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सांसद उमेश पटेल द्वारा लोकसभा में दमणगंगा नदी प्रदूषण पर पूछे गये प्रश्न में हुआ खुलासा

केन्द्र सरकार ने माना वापी की 500 से अधिक कंपनियों ने प्रदूषित पानी दमणगंगा में छोडा है: कंपनियों पर 117.72 करोड रूपये का पर्यावरणीय मुआवजा ठोका गया

असली आजादी न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली 10 अगस्त। दमण-दीव के सांसद उमेश पटेल द्वारा लोकसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या – 3462 Restoration of Daman Ganga River (दमणगंगा नदी का पुनरुद्धार) के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दमणगंगा नदी और वापी औद्योगिक क्षेत्र के प्रदूषण से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों को संसद के रिकॉर्ड पर स्वीकार किया है। मंत्रालय ने अपने जवाब में बताया कि एनजीटी के समक्ष चले Original Application No. 95/ 2018 (PB) में वापी औद्योगिक क्षेत्र की 500 से अधिक औद्योगिक इकाइयों द्वारा Untreated / Partially Treated Trade Effluent (बिना उपचारित / आंशिक रूप से उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल) दमणगंगा नदी में छोड़े जाने, नदी के प्रदूषण तथा औद्योगिक एवं सीईटीपी द्वारा Discharge Standards IZY Non-Compliance का मामला सामने आया था। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि माननीय एनजीटी ने दिनांक 28 अगस्त 2019 के आदेश में कुल 117.72 करोड़ रूपये का पर्यावरणीय मुआवजा निर्धारित किया था, जिसमें 92.36 करोड़ रूपये सीईटीपी तथा 25.36 करोड़ रूपये अलग-अलग उद्योगों से संबंधित था। हालांकि सांसद उमेश पटेल ने सवाल उठाया है कि मंत्रालय ने उनके प्रश्न में मांगी गई कई महत्वपूर्ण जानकारियों का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। उन्होंने कहा कि प्रश्न में एनजीटी के आदेशों के वास्तविक अनुपालन, गैर-अनुपालन के कारण, प्रदूषण फैलाने वाले द्वारा भुगतान का सिद्धांत, एहतियाती सिद्धांत, बहाली की लागत, कार्यान्वयन की समय-सीमा, जिम्मेदार एजेंसियां तथा पारिस्थितिकीय कोष और जवाबदेही तंत्र के बारे में स्पष्ट जानकारी मांगी गई थी, लेकिन मंत्रालय ने अधिकांश बिंदुओं पर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने और स्टे होने का उल्लेख किया है। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि यदि सरकार स्वयं स्वीकार कर रही है कि 500 से अधिक औद्योगिक इकाइयों से बिना उपचारित/आंशिक रूप से उपचारित अपशिष्ट जल दमणगंगा नदी में छोड़े जाने का मामला सामने आया और 117.72 करोड़ रूपये पर्यावरणीय मुआवजा निर्धारित हुआ, तो जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि आज तक वास्तव में कितना मुआवजा वसूला गया। नदी के पुनरुद्धार पर कितना खर्च हुआ और प्रदूषण करने वालों के विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई। उन्होंने विशेष रूप से 728.72 करोड रूपये के पर्यावरण बहाली का आकलन/ढांचा की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि इसकी उङ्मेस्रङ्मल्लील्ल३ ह्र२ी (घटकों के अनुसार) जानकारी- मंजूरी, वसूली, खर्च, भौतिक प्रगति और लंबित कार्य संसद एवं जनता के सामने रखी जानी चाहिए। सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी संयुक्त निरीक्षण में सीईटीपी अथवा उद्योग निर्धारित स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन करते पाए गए, तो उसके बाद कितनी इकाइयों को क्लोजर नोटिस दिया गया, कितनों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया और कितनों के विरुद्ध अभियोग पक्ष की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि केवल यह कहना कि उद्योग को मानकों के पालन पर ही प्रचालन करने दिया जाता है, पर्याप्त नहीं है, सरकार को वास्तविक निरीक्षण और प्रवर्तन डेटा सामने रखना चाहिए। सांसद उमेश पटेल ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से सीपीसीबी, जीपीसीबी और दादरा नगर हवेली एवं दमण-दीव प्रदूषषण नियंत्रण समिति की संयुक्त उच्चस्तरीय समीक्षा कराने और दमणगंगा नदी पुनरुद्धार और प्रदूषण नियंत्रण कार्य योजना तैयार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दमणगंगा नदी गुजरात से होकर दमण में अरब सागर में मिलती है, इसलिए अपस्ट्रीम औद्योगिक प्रदूषण का प्रभाव दमण के नागरिकों, पर्यावरण और समुद्री पारिस्थितिकी पर भी पड़ता है। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि दमणगंगा की स्वच्छता किसी एक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का विषय नहीं है। नदी प्रदूषित होगी तो उसका प्रभाव सीमा देखकर नहीं रुकेगा। दमणगंगा को प्रदूषण से मुक्त कराने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय कराने के लिए यह लड़ाई संसद से लेकर संबंधित मंत्रालयों तक लगातार जारी रहेगी।

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