असली आजादी न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली 20 जुलाई। दमण-दीव लोकसभा क्षेत्र के सांसद उमेश पटेल ने आज लोकसभा में अतारांकित प्रश्न संख्या 155 के माध्यम से गुजरात के वापी-वलसाड औद्योगिक क्षेत्र से दमणगंगा, कोलक एवं बिलखाड़ी नदियों तथा तटीय क्षेत्रों में फैल रहे औद्योगिक प्रदूषण का अत्यंत गंभीर मुद्दा उठाया। अपने प्रश्न में सांसद उमेश पटेल ने सरकार से यह जानकारी मांगी कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण एवं अन्य न्यायालयों द्वारा वर्ष 2000 से अब तक दिए गए आदेशों का अनुपालन किस स्थिति में है, वर्ष 2019 के पुनरुद्धार आदेश के बाद क्या कार्रवाई हुई, कितने नए रासायनिक एवं औषधि उद्योगों को पर्यावरणीय स्वीकृतियां दी गईं तथा गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्र होने के बावजूद नए उद्योगों को अनुमति देने में कौन-सी अतिरिक्त शर्तें लागू की गईं। सरकार ने अपने उत्तर में स्वीकार किया कि वापी- वलसाड क्षेत्र के औद्योगिक प्रदूषण को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं तथा इस विषय पर एनजीटी में मामला विचाराधीन रहा है। उत्तर में यह भी बताया गया कि वर्ष 2019 से अब तक वापी औद्योगिक क्षेत्र में 82 परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी (एल्ल५्र१ङ्मल्लेील्ल३ं’ उ’ीं१ंल्लूी) प्रदान की गई है। साथ ही यह भी स्वीकार किया गया कि वापी क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्र (उ१्र३्रूं”८ ढङ्म”४३ीि अ१ीं) के रूप में चिन्हित किया गया है। इस अवसर पर सांसद उमेश पटेल ने कहा कि सरकार द्वारा दी गई जानकारी कई महत्वपूर्ण प्रश्नों को जन्म देती है। यदि क्षेत्र पहले से ही गंभीर रूप से प्रदूषित है और ठॠळ द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए कड़े निर्देश दिए जा चुके हैं, तो ऐसे क्षेत्र में लगातार नई पर्यावरणीय स्वीकृतियां देना गंभीर नीति-गत प्रश्न है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य, नदियों, भूजल तथा समुद्री पारिस्थितिकी की कीमत पर किसी भी प्रकार का विकास स्वीकार्य नहीं हो सकता। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि वे इस विषय को केवल संसद तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि संबंधित मंत्रालय, उढउइ, ॠढउइ तथा अन्य सक्षम प्राधिकरणों के समक्ष भी इस मामले को लगातार उठाते रहेंगे। आवश्यकता पड़ने पर आगे और संसदीय एवं कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी, ताकि दमणगंगा, कोलक और बिलखाड़ी नदियों को प्रदूषण से मुक्त कराया जा सके तथा भविष्य में पर्यावरणीय कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो।

