– रिपोर्ट में ग्लोबल वार्मिंग की वजह के असर को लेकर दी गईं कई गंभीर चेतावनियां
जिनेवा,(ईएमएस)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से मुंबई जैसे शहरों में रह रहे लाखों लोग प्रभावित हो सकते हैं। सोमवार को जारी रिपोर्ट में ग्लोबल वार्मिंग की वजह से समुद्र का जलस्तर बढ़ने के असर को लेकर कई गंभीर चेतावनियां दी गई हैं। ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर और बर्फ की परतें पिघलती हैं और पानी गर्म होता है, जिससे संपत्ति, लोगों और यहां तक कि संस्कृतियों पर भी असर पड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में समुद्र के जलस्तर में सालाना बढ़ोतरी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है और यह करीब छह मिलीमीटर दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र का जलस्तर बढ़ने से इसके कई द्वीप काफी हद तक डूब सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा इलाकों और भारत के मुंबई जैसे शहरों में सबसे बड़ा असर लोगों के विस्थापन के रूप में दिख रहा है। यहां 1.4 करोड़ से ज्यादा लोगों के घर हमेशा के लिए पानी में डूबने का खतरा है। इस डरावनी स्थिति के होने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है। न्यूयॉर्क में असिस्टेंट सेक्रेटरी-जनरल ने कहा कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर एक चुनौती पेश करता है, क्योंकि उन इलाकों में लोग अपना तटीय इलाका खो रहे हैं। समुद्र के बढ़ते जलस्तर का असर सिर्फ तटीय इलाकों तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि समुद्र के बढ़ते जलस्तर को एक बड़ी व्यवस्थागत समस्या के तौर पर देखें, क्योंकि इसका असर सेहत, खाद्य सुरक्षा, मानवाधिकारों और संस्कृति पर पड़ेगा। आप अपनी पुश्तैनी जमीन और अपनी पहचान खो देंगे। इसलिए सरकारों को इस मुद्दे को अपनी योजना बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाने के लिए बहुत व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
पिछले सप्ताह नेपाल-तिब्बत सीमा पर हिमालय से ग्लेशियर के टूटने और नीचे गिरने से पानी और कीचड़ का सुनामी जैसा सैलाब आया, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और कई इलाके बर्बाद हो गए। दक्षिण एशिया पर ग्लेशियरों के पिघलने या नीचे गिरने के असर के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हिमालय के ग्लेशियरों को तीसरा ध्रुव माना जाता है। उन्होंने कहा, हमारे पास उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव हैं और दक्षिण एशिया में दुनिया के ग्लेशियरों का बड़ा जमावड़ा होने के कारण इसे तीसरा ध्रुव माना जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से पहले ही शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, जल प्रणालियों, परिवहन, ऊर्जा ग्रिड, इमारतों और भूजल संसाधनों को नुकसान पहुंच रहा है। इसके दूरगामी परिणाम हो रहे हैं, जो लंबे समय में मानवाधिकारों के प्रभावी उपभोग के लिए खतरा पैदा करते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हालांकि समुद्र का जलस्तर बढ़ने का खतरा सबसे अधिक द्वीपीय देशों को महसूस होगा, लेकिन यह खतरा भौगोलिक सीमाओं को नहीं मानता। उदाहरण के लिए, अमेरिका में मियामी और न्यूयॉर्क और चीन में ग्वांगझू जैसे ज्यादा आय वाले शहरों में मुख्य असर तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ने वाला भारी वित्तीय जोखिम है, जिसमें खतरे में पड़ी संपत्तियों का अनुमानित मूल्य 2 ट्रिलियन डॉलर से 3.5 ट्रिलियन डॉलर के बीच है।

