वापी एवं वलसाड दोनों डंप यार्डों का संयुक्त वैज्ञानिक निरीक्षण कराने की उठाई मांग
– दमणगंगा नदी (वापी) एवं ओरंगा नदी (वलसाड) के तट पर संचालित नगरपालिकाओं के ठोस अपशिष्ट डंप यार्डों से संभावित गंभीर पर्यावरणीय प्रदूषण, पर्यावरणीय
कानूनों के उल्लंघन की उच्चस्तरीय संयुक्त जांच, नदी तटों से इन डंपिंग स्थलों को तत्काल हटाने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की उठाई मांग
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली 19 जुलाई। सांसद उमेश पटेल ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को लिखे पत्र में बताया है कि गुजरात के वलसाड जिले में स्थित दो अत्यंत गंभीर पर्यावरणीय मामलों की ओर आपका ध्यानाकर्षित करना चाहता हूँ, जिनका सीधा संबंध नदियों के संरक्षण, भूजल, समुद्री पारिस्थितिकी, मत्स्य संसाधनों, पर्यावरणीय सुरक्षा तथा लाखों नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। पहला मामला वापी महानगरपालिका द्वारा दमणगंगा नदी के तट पर संचालित ट४ल्ल्रू्रस्रं’ रङ्म’्रि हं२३ी (टरह) रीॅ१ीॅं३्रङ्मल्ल, ळ१ीं३ेील्ल३, ढ१ङ्मूी२२्रल्लॅ, फीू८ू’्रल्लॅ एवं उङ्मेस्रङ्म२३ ढ१ङ्म्नीू३ का है। इस संबंध में मुझे लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं तथा स्थल निरीक्षण के दौरान भी अनेक गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। शिकायतों के अनुसार वर्षा ऋतु में डंप यार्ड से निकलने वाला लीचेट (छींूँं३ी) एवं ठोस अपशिष्ट दमणगंगा नदी की ओर बहता है, जिससे नदी, भूजल तथा समुद्री पर्यावरण प्रदूषित होने का गंभीर खतरा उत्पन्न होता है। दूसरा मामला वलसाड नगरपालिका द्वारा ओरंगा नदी के तट पर संचालित डंप यार्ड का है। स्थानीय नागरिकों से प्राप्त शिकायतों के अनुसार नगर का मिश्रित ठोस कचरा बड़े पैमाने पर खुले में डंप किया जा रहा है। यह भी जानकारी मिली है कि डंप यार्ड पर केवल दिखावे के लिए रीॅ१ीॅं३्रङ्मल्ल, ढ१ङ्मूी२२्रल्लॅ, फीू८ू’्रल्लॅ आदि का कुछ बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर निर्मित किया गया है, किन्तु स्थानीय लोगों के अनुसार अधिकांश सुविधाएँ लंबे समय से कार्यशील नहीं हैं तथा उनका वास्तविक उपयोग नहीं किया जा रहा है। परिणामस्वरूप अधिकांश कचरा बिना वैज्ञानिक प्रसंस्करण के खुले में जमा किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त यह भी शिकायत प्राप्त हुई है कि डंप यार्ड के चारों ओर पर्याप्त बाउंड्री वॉल उपलब्ध नहीं है, वर्षा के दौरान कचरा एवं लीचेट नदी की ओर बहने की आशंका बनी रहती है तथा समय-समय पर प्लास्टिक एवं अन्य ठोस कचरे को खुले में जलाकर उसका निपटान किया जाता है, जिससे विषैली गैसें वातावरण में फैलती हैं और आसपास के नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं गंभीर विषय है कि गुजरात के दक्षिणी क्षेत्र की दो महत्वपूर्ण नदियों-दमणगंगा एवं ओरंगा— के किनारे नगरपालिकाओं के बड़े डंपिंग स्थल संचालित किए जा रहे हैं। यदि इनका संचालन वैज्ञानिक मानकों एवं पर्यावरणीय कानूनों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है, तो इससे नदियां, भूजल, अरब सागर, मत्स्य संसाधन, कृषि भूमि एवं जैव विविधता पर अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है। यदि उपरोक्त शिकायतें सत्य पाई जाती हैं, तो यह एल्ल५्र१ङ्मल्लेील्ल३ (ढ१ङ्म३ीू३्रङ्मल्ल) अू३, 1986, हं३ी१ (ढ१ी५ील्ल३्रङ्मल्ल ंल्लि उङ्मल्ल३१ङ्म’ ङ्मा ढङ्म”४३्रङ्मल्ल) अू३, 1974, अ्र१ (ढ१ी५ील्ल३्रङ्मल्ल ंल्लि उङ्मल्ल३१ङ्म’ ङ्मा ढङ्म”४३्रङ्मल्ल) अू३, 1981 तथा रङ्म’्रि हं२३ी टंल्लंॅीेील्ल३ फ४’ी२, 2016 का गंभीर उल्लंघन होगा। आपसे मेरा विनम्र अनुरोध है कि टङ्मएऋउउ के निर्देश पर उढउइ, ॠढउइ एवं जिला प्रशासन की उच्चस्तरीय संयुक्त जांच समिति तत्काल गठित की जाए। वापी एवं वलसाड दोनों डंप यार्डों का संयुक्त वैज्ञानिक निरीक्षण कराया जाए। मेरे द्वारा संलग्न 25 बिंदुओं पर विस्तृत तकनीकी जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। दोनों डंप यार्डों पर स्थापित सभी रीॅ१ीॅं३्रङ्मल्ल, फीू८ू’्रल्लॅ, उङ्मेस्रङ्म२३्रल्लॅ, ढ१ङ्मूी२२्रल्लॅ एवं अन्य संयंत्रों की वास्तविक कार्यशीलता (डस्री१ं३्रङ्मल्लं’ र३ं३४२) की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि वे प्रतिदिन कितनी क्षमता से कार्य कर रहे हैं। यदि कोई संयंत्र केवल कागजों में अथवा दिखावे के लिए स्थापित पाया जाता है तथा वास्तविक रूप से संचालित नहीं हो रहा है, तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार एजेंसियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। नदी, भूजल, मिट्टी एवं वायु गुणवत्ता की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराई जाए। खुले में कचरा जलाने, लीचेट बहने तथा पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध पर्यावरणीय कानूनों के अंतर्गत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। 8. पिछले पाँच वर्षों की निरीक्षण रिपोर्ट, नोटिस, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति, अनुपालन रिपोर्ट एवं कार्रवाई का पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाए। आवश्यकता होने पर ठएएफक, ककळ अथवा किसी अन्य स्वतंत्र राष्ट्रीय तकनीकी संस्था से पर्यावरणीय ऑडिट कराया जाए। इसके अतिरिक्त कृपया 25 बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी एवं जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का कष्ट करें। जिसमें दोनों डंप यार्डों का क्षेत्रफल, सर्वे नंबर, स्थापना वर्ष एवं स्वीकृत क्षमता, उळए, उळड एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रतियां, रङ्म’्रि हं२३ी टंल्लंॅीेील्ल३ फ४’ी२, 2016 के अनुपालन की स्थिति, नदी से वास्तविक दूरी एवं अनुमेय मानकों का पालन, बाउंड्री वॉल एवं सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति, लीचेट नियंत्रण एवं उपचार प्रणाली का विवरण, रीॅ१ीॅं३्रङ्मल्ल, टफऋ, फीू८ू’्रल्लॅ, उङ्मेस्रङ्म२३्रल्लॅ एवं ढ१ङ्मूी२२्रल्लॅ ढ’ंल्ल३ की स्थिति, प्रतिदिन प्राप्त होने वाले कचरे का श्रेणीवार विवरण, खुले में कचरा जलाने की घटनाओं एवं कार्रवाई का विवरण, पिछले पाँच वर्षों के निरीक्षणों का विवरण, जारी नोटिस एवं दंडात्मक कार्रवाई का विवरण, नदी, भूजल एवं मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट, वायु गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, नदी में प्रदूषण पहुँचने के वैज्ञानिक प्रमाण, ऋ्र१ी रंाी३८ एवं छंल्लिा्र” ॠं२ टंल्लंॅीेील्ल३ की व्यवस्था, नागरिकों के स्वास्थ्य प्रभाव संबंधी अध्ययन, वैज्ञानिक छंल्लिा्र” उी” की उपलब्धता, रङ्म४१ूी रीॅ१ीॅं३्रङ्मल्ल की स्थिति, पिछले पाँच वर्षों का वित्तीय व्यय एवं अनुदान, स्वतंत्र पर्यावरणीय ऑडिट रिपोर्ट, जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई, डउएटर, उउळश् एवं सार्वजनिक सूचना बोर्ड की स्थिति, मत्स्य संसाधनों, जैव विविधता एवं समुद्री पर्यावरण पर प्रभाव का अध्ययन, सुधार अथवा स्थानांतरण की समयबद्ध कार्ययोजना एवं संपूर्ण संयुक्त जांच प्रतिवेदन, फोटोग्राफ, ड्रोन सर्वेक्षण, ॠकर मानचित्र एवं अनुपालन रिपोर्ट शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण एवं तत्काल मांग करते हुए सांसद उमेश पटेल ने मंत्रालय से विशेष रूप से आग्रह किया है कि दमणगंगा नदी एवं ओरंगा नदी के तट पर स्थित इन दोनों नगरपालिकाओं के डंपिंग स्थलों का पर्यावरणीय, वैज्ञानिक एवं कानूनी दृष्टि से पुनर्मूल्यांकन कराया जाए तथा यदि ये नदी तंत्र, भूजल एवं जनस्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण पाए जाते हैं, तो इन्हें तत्काल नदी किनारों से हटाकर पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप उपयुक्त वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। नदियां किसी भी नगर का कूड़ाघर नहीं हो सकतीं। नदी तटों पर डंपिंग साइटों का संचालन भविष्य की पीढि़यों के जल, पर्यावरण एवं जीवन के साथ गंभीर खिलवाड़ है। इसलिए इन दोनों डंपिंग स्थलों को नदी किनारों से हटाना ही इस समस्या का स्थायी एवं वैज्ञानिक समाधान है। साथ ही कृपया संलग्न 25 बिंदुओं पर विस्तृत जांच प्रतिवेदन, सभी निरीक्षण रिपोर्ट, जल एवं मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट, ड्रोन सर्वेक्षण, ॠकर मानचित्र, फोटोग्राफ तथा की गई कार्रवाई का विवरण उपलब्ध कराने का कष्ट करें। यह विषय केवल वापी एवं वलसाड तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पश्चिमी भारत की नदियों, समुद्री पारिस्थितिकी, पर्यावरण संरक्षण एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा राष्ट्रीय महत्व का विषय है। अत: मंत्रालय स्वयं इसकी निगरानी करते हुए समयबद्ध एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे।

