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वापी कोर्ट के आदेश के बाद वापी महानगरपालिका के दो काउंसिलरों के खिलाफ मामला दर्ज

– वॉर्ड नं. 3 के भाजपा काउंसिलर सुनीता तिवारी और शमसुद्दीन चौधरी के खिलाफ फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर चुनाव जीतने का लगा है आरोप, डुंगरा पुलिस ने शुरू की जांच

असली आजादी न्यूज नेटवर्क, वापी 19 जुलाई। वापी महानगरपालिका के दो काउंसिलरों के खिलाफ डुंगरा पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ है। वापी कोर्ट के आदेश के बाद वापी महानगरपालिका के वॉर्ड नं. 3 के भाजपा काउंसिलर सुनीता तिवारी और शमसुद्दीन चौधरी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस स्टेशन से मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला तब सामने आया जब वापी के छिरी इलाके के रहने वाले मोहम्मद इमरान अब्दुल रऊफ मिर्जा ने वापी कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। इस मामले में आरोप है कि वापी महानगरपालिका में भाजपा की महिला काउंसिलर (जो एक प्राइवेट स्कूल की प्रिंसिपल भी हैं) सुनीता उमेशचंद्र तिवारी और काउंसिलर के शमसुद्दीन नूरुद्दीन चौधरी ने पहले से सोची-समझी आपराधिक साजिश रची। आरोप है कि प्राइवेट स्कूल की प्रिंसिपल सुनीता तिवारी की मदद और मिलीभगत से शमसुद्दीन चौधरी के लिए राता स्थित हिंदी विद्या मंदिर स्कूल से एक फर्जी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एलसी) बनवाया गया। शिकायत के अनुसार, इस फर्जी लीविंग सर्टिफिकेट में शमसुद्दीन चौधरी की जन्मतिथि 16/11/1994 दिखाई गई थी। लेकिन सेंट जेवियर्स स्कूल के आधिकारिक बोर्ड रिकॉर्ड और 10वीं कक्षा के एडमिशन फॉर्म की जांच करने पर पता चला कि उनकी असली जन्मतिथि 13/11/1998 थी। साल 2015 में हुए छिरी तालुका पंचायत चुनाव के समय, शमसुद्दीन की असली उम्र सिर्फ 16 साल 11 महीने थी। चुनाव लड़ने के लिए कानूनी रूप से अयोग्य होने के बावजूद, इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वह वॉर्ड नंबर 2 से चुनाव जीते और लगातार 5 साल तक सत्ता का आनंद लिया। 2026 के नगर निकाय चुनावों में बीजेपी के टिकट पर धोखाधड़ी की गई। इतना ही नहीं इसी साल 2026 में हुए वापी नगरपालिका के आम चुनावों में भी यहीं गडबडी किया गया। शमसुद्दीन चौधरी ने भाजपा के टिकट पर वापी नगरपालिका के वॉर्ड नंबर 3 से अपनी उम्मीदवारी दाखिल की थी। नामांकन फॉर्म भरते समय, उन्होंने ममलतदार कार्यालय (बलिठा) में एक नोटरी वकील के माध्यम से तैयार किया गया, झूठा हलफनामा जमा किया और अपनी उम्र 31 साल बताकर राज्य चुनाव आयोग और सरकारी तंत्र को गुमराह किया। साथ ही 28 अप्रैल 2026 को चुनाव जीतकर काउंसिलर बने। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और जांच वापी जीआईडीसी पुलिस को सौंप दी गई। इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद शिकायतकर्ता ने वापी अदालत में आपराधिक विविध आवेदन संख्या 423/2026 दायर किया। अदालत के सख्त रुख और आदेश के बाद डुंगरा पुलिस ने दोनों भाजपा काउंलिसरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) 2023 की धाराओं 339(2), 339(3), 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में फर्जी दस्तावेज बनाना, झूठे सबूतों को असली के तौर पर इस्तेमाल करना और आपराधिक साजिश रचना शामिल है। चूंकि घटना स्थल वापी जीआईडीसी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए आगे की गहन जांच वापी जीआईडीसी पुलिस को सौंप दी गई है। दो काउंसिलरों के खिलाफ मामला दर्ज होने से राजनीतिक गलियारे में खलबली मची हुई है।

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