– 2011 की एक्साइज भर्ती प्रक्रिया में दखल देने से जुड़ा है मामला; निचली अदालत का फैसला फिलहाल
बरकरार, अब हाईकोर्ट का रुख करना होगा
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण, 17 अगस्त। दमण-दीव के सांसद उमेश पटेल की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। दमण सेशन कोर्ट ने एक्साइज विभाग की भर्ती प्रक्रिया में दखल देने के मामले में उन्हें सुनाई गई दो साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही दमण डि्ट्रिरक्ट कोर्ट का फैसला फिलहाल बरकरार है। अब राहत के लिए सांसद उमेश पटेल को हाईकोर्ट का रुख करना होगा। दमण डि्ट्रिरक्ट कोर्ट ने 1 अगस्त 2026 को वर्ष 2011 की एक्साइज विभाग भर्ती प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के मामले में उमेश पटेल को दो साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने दमण सेशन कोर्ट में अपील दायर कर सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। मामले की सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि वर्ष 2011 में फुटबॉल ग्राउंड पर आयोजित भर्ती प्रक्रिया में भाग ले रहे एक युवक के साथ कथित रूप से अन्याय हो रहा था। इसी कारण उमेश पटेल वहां पहुंचे थे। बचाव पक्ष ने इन्हीं परिस्थितियों का हवाला देते हुए सजा पर रोक लगाने की मांग की। सरकारी वकील हरिओम उपाध्याय ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि फुटबॉल ग्राउंड पर कोई मैच नहीं, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए वहां पुलिसकर्मी भी तैनात थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उमेश पटेल ने सुरक्षाकर्मियों को धक्का देकर जबरन भर्ती स्थल में प्रवेश किया और सरकारी प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया। सरकारी वकील ने कोर्ट के समक्ष यह भी दावा किया कि डि्ट्रिरक्ट कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद उमेश पटेल ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश एस. तिवारी ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया में किसी को भी इस तरह प्रवेश करने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। कोर्ट ने उमेश पटेल की याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत से सुनाई गई सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। वहीं, पुलिस प्रशासन की ओर से डि्ट्रिरक्ट कोर्ट द्वारा हटाई गई तीन धाराओं को दोबारा जोड़ने की मांग को लेकर भी सेशन कोर्ट में अपील की गई थी। कोर्ट ने इस अपील को स्वीकार करते हुए मामले की प्रतिदिन सुनवाई करने का आदेश दिया है।
संसद सदस्यता पर लग गया प्रश्नचिन्ह
दमण-दीव सांसद उमेश पटेल को डि्ट्रिरक्ट कोर्ट से सजा होने के बाद आज सेशन कोर्ट ने सजा पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया है। इससे सांसद उमेश पटेल की न सिर्फ मुश्किलें बढी है बल्कि उनकी संसद सदस्यता पर भी अब प्रश्न चिन्ह लग चुका है। अब सबकी निगाहें लोकसभा सचिवालय और माननीय हाईकोर्ट पर रहेगी। जानकारों की माने तो सांसद उमेश पटेल सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। हाईकोर्ट से अगर उन्हें राहत नहीं मिलती है तो सुप्रीम कोर्ट ही उनके लिए आखिरी उम्मीद रहेगी। दूसरी ओर लोकसभा स्पीकर का रुख भी बहुत ही महत्वपूर्ण रहेगा।

