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दमण के युवा माछीमार गौरांग टंडेल ने मछुआरों के लिए डॉकयार्ड सुविधा शीघ्र उपलब्ध कराने की उठाई मांग

– हर वर्ष मानसून के दौरान नावों को पहुंचता है भारी नुकसान: बडी संख्या में माछीमार परिवारों की आजीविका पर संकट
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण 27 जुलाई। दमण के युवा माछीमार गौरांग हितेश टंडेल ने दमण के मछुआरों के लिए शीघ्र डॉकयार्ड सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि काफी वर्षों से दमण के मछुआरों को मानसून के दौरान गंभीर समस्याओं का सामना करना पड रहा है। वर्षों से प्रत्येक मानसून के दौरान मछुआरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड रहा है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कई मछुआरों की नावें समुद्र की प्रतिकूल परिस्थितियों में पूरी तरह नष्ट हो गई, जबकि अनेक नावों को 50 से 60 प्रतिशत तक क्षति पहुंची है। इससे बडी संख्या में माछीमार परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। विशेष रूप से छोटी नावों पर निर्भर मछुआरे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों ने अपनी आय का एकमात्र साधन खो दिया है। मछुआरों का कहना है कि हर वर्ष इस प्रकार की परिस्थितियों का सामना करना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है और अब स्थायी समाधान की आवश्यकता है। मछुआरा समुदाय ने प्रशासन से मांग की है कि दमण में शीघ्र एक सुरक्षित डॉकयार्ड उपलब्ध कराया जाए, जहां नावों की सुरक्षित पार्किंग, मरम्मत तथा रखरखाव की समुचित व्यवस्था उपलब्ध हो। उनका मानना है कि डॉकयार्ड उपलब्ध होने से मानसून के दौरान होने वाले भारी आर्थिक नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकेगा तथा माछीमार परिवारों को राहत मिलेगी। मछुआरों ने यह भी मांग की है कि जब भी डैम से पानी छोड़ना हो तब मछुआरों को इसके बारे में समय रहते सूचना उपलब्ध कराई जाए। साथ ही ऑफ-सीजन के दौरान नावों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी संबंधित विभाग द्वारा सुनिश्चित की जानी चाहिए। माछीमार समुदाय का कहना है कि आज दमण एक विकसित पर्यटन शहर के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, लेकिन इस विकास के साथ यहां के पारंपरिक मछुआरों की समस्याओं और आवश्यकताओं पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना जरूरी है। उनका कहना है कि वे सरकार से किसी प्रकार की आर्थिक सहायता या आवास की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल एक सुरक्षित डॉकयार्ड चाहते हैं, जहां उनकी नावों की सुरक्षा, मरम्मत और रखरखाव की सुविधा उपलब्ध हो सके। युवा माछीमार गौरांग हितेश टंडेल ने कहा है कि यह केवल एक बुनियादी सुविधा का मुद्दा नहीं है, बल्कि दमण के बडी संख्या में माछीमार परिवारों की सुरक्षा, आजीविका और भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने प्रशासन से इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक कदम उठाने की अपील की है।

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