– रेल मंत्रालय ने टिकट दलाली मामले में पश्चिम रेलवे के 9 रेल कर्मचारियों के गिरफ्तार होने की दी जानकारी
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली 12 अगस्त। दमण-दीव के सांसद उमेश पटेल ने आज लोकसभा में तारांकित प्रश्न संख्या- 345 पश्चिम रेलवे के रेलवे स्टेशनों पर काम न करने वाली लिफ्ट, एस्केलेटर और फुट ओवर ब्रिज के माध्यम से पश्चिम रेलवे के स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की वास्तविक स्थिति तथा तत्काल टिकट दलाली में संभावित आंतरिक मिलीभगत का महत्वपूर्ण विषय उठाया। सांसद उमेश पटेल ने रेल मंत्रालय से पूछा था कि क्या पश्चिम रेलवे के विभिन्न स्टेशनों पर लिफ्ट, एस्केलेटर और फुट ओवर ब्रिज रिकॉर्ड में चालू दिखाए जाने के बावजूद लंबे समय तक बंद रहे हैं तथा क्या इन सुविधाओं का भौतिक सत्यापन कराया गया है। उन्होंने सत्यापन की रिपोर्ट सदन में रखने की समय-सीमा भी मांगी थी। रेल मंत्रालय ने अपने उत्तर में बताया कि वर्तमान में पश्चिम रेलवे के 46 रेलवे स्टेशनों पर 191 एस्केलेटर तथा 86 रेलवे स्टेशनों पर 240 लिफ्ट उपलब्ध कराई गई हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि पश्चिम रेलवे के किसी स्टेशन पर कोई लिफ्ट, एस्केलेटर या फुट ओवर ब्रिज स्थायी रूप से बंद नहीं है तथा रखरखाव, मरम्मत अथवा अन्य परिचालन कारणों से अस्थायी रूप से बंद होने की स्थिति में यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध रहती है। हालांकि सांसद उमेश पटेल ने कहा कि मंत्रालय के उत्तर में उनके मूल प्रश्न के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। विशेष रूप से कितने स्टेशनों का भौतिक सत्यापन किया गया, सत्यापन कब और किस अधिकारी/एजेंसी द्वारा किया गया, रिकॉर्ड में दर्ज स्थिति और वास्तविक जमीनी स्थिति में कोई अंतर पाया गया या नहीं तथा सत्यापन रिपोर्ट सदन के पटल पर कब रखी जाएगी, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। सांसद उमेश पटेल द्वारा पिछले तीन वर्षों में तत्काल टिकट दलाली के मामलों में रेलवे कर्मचारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मंत्रालय ने महत्वपूर्ण आंकड़े सदन के सामने रखे। रेल मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 तथा जून 2026 तक पूरे भारतीय रेलवे में 65 रेलवे कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें पश्चिम रेलवे के 9 कर्मचारी शामिल हैं। इसी अवधि में रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 143 के अंतर्गत 13,580 टिकट दलालों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी दी गई। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि यह आंकड़ा अपने आप में गंभीर है। जब टिकट दलाली से जुड़े मामलों में रेलवे कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई है, तो इस पूरे तंत्र में संभावित आंतरिक मिलीभगत की निष्पक्ष एवं गहन जांच की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्न में रेलवे कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई का वर्षवार विवरण मांगा गया था, लेकिन मंत्रालय ने संयुक्त आंकड़ा प्रस्तुत किया। इसी प्रकार यह भी पूछा गया था कि क्या इस व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी, लेकिन इस पर भी सरकार की ओर से स्पष्ट हाँ या ना में उत्तर नहीं दिया गया। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि हमारा उद्देश्य रेलवे की आलोचना करना नहीं, बल्कि यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की जमीनी हकीकत और सार्वजनिक व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यदि रिकॉर्ड में कोई सुविधा चालू दिखाई जाती है, तो वह वास्तव में यात्रियों के लिए चालू भी होनी चाहिए। इसी प्रकार यदि तत्काल टिकट दलाली के मामलों में रेलवे कर्मचारी तक गिरफ्तार हुए हैं, तो यह जानना जरूरी है कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं और क्या इसकी स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुविधा और टिकट व्यवस्था में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। इस विषय पर रेल मंत्रालय से स्टेशनवार भौतिक सत्यापन रिपोर्ट, गैर-कार्यशील सुविधाओं का विवरण, रेलवे कर्मचारियों पर वर्षवार कार्रवाई तथा टिकट दलाली में संभावित आंतरिक मिलीभगत की स्वतंत्र जांच के संबंध में आगे भी जवाब मांगा जाएगा।

