– सांसद उमेश पटेल ने टेरिटोरियल काउंसिल, जनप्रतिनिधियों की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी और राज्यसभा प्रतिनिधित्व की उठाई मांग
– गृह मंत्रालय का जवाब: केंद्र शासित प्रदेश में सहभागी शासन के लिए पर्याप्त लोकतांत्रिक व्यवस्था मौजूद है, केंद्र शासित प्रदेश का लोकसभा में दो निर्वाचित सांसदों के माध्यम से प्रतिनिधित्व है और 73वें एवं 74वें संविधान संशोधन के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में दो स्तरीय पंचायत व्यवस्था एवं शहरी क्षेत्रों में नगर पालिकाएं कार्यरत हैं
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली 11 अगस्त। दादरा नगर हवेली और दमण-दीव में निर्वाचित विधायी निकाय के अभाव और विकास एवं प्रशासनिक निर्णयों में स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की अधिक प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण विषय आज लोकसभा में उठा। दमण-दीव के सांसद उमेश पटेल द्वारा लोकसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या 3838-Absence of Elected Legislative Body के माध्यम से केंद्र सरकार से केंद्र शासित प्रदेश में लोकतांत्रिक भागीदारी को और मजबूत करने के संबंध में कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए। सांसद उमेश पटेल ने गृह मंत्रालय से पूछा कि क्या सरकार इस तथ्य से अवगत है कि दादरा नगर हवेली और दमण एवं दीव में निर्वाचित विधानसभा जैसे विधायी निकाय के अभाव में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की प्रशासनिक एवं विकास संबंधी निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी सीमित है। उन्होंने सरकार के समक्ष Development / Advisory Territorial Council गठित करने का प्रस्ताव भी रखा, जिसमें सांसदों, जिला पंचायतों, नगरपालिकाओं तथा अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। साथ ही ऐसी परिषद को विकास योजनाओं की प्राथमिकता तय करने, बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा तथा महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों में अनिवार्य परामर्श का अधिकार देने पर सरकार का रुख पूछा। सांसद उमेश पटेल ने एक और महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हुए पूछा कि क्या केंद्र सरकार ने अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का अध्ययन कर दादरा नगर हवेली और दमण-दीव को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व तथा अधिक लोकतांत्रिक स्वशासन प्रदान करने के संबंध में कोई नीति तैयार की है। सांसद उमेश पटेल के प्रश्नों का केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने अपने लिखित उत्तर में कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में सहभागी शासन के लिए पर्याप्त लोकतांत्रिक व्यवस्था मौजूद है। मंत्रालय ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश का लोकसभा में दो निर्वाचित सांसदों के माध्यम से प्रतिनिधित्व है तथा 73वें एवं 74वें संविधान संशोधन के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में दो स्तरीय पंचायत व्यवस्था और शहरी क्षेत्रों में नगर पालिकाएं कार्यरत हैं। सरकार ने स्थानीय निकायों की भूमिका और सरपंचों को दिए गए वित्तीय अधिकारों का भी उल्लेख किया। हालांकि सांसद उमेश पटेल द्वारा पूछे गए (बी) से (डी) तक के महत्वपूर्ण सवालों – Territorial/ Advisory Council के गठन, उसे परामर्श संबंधी अधिकार देने तथा राज्यसभा प्रतिनिधित्व एवं अधिक लोकतांत्रिक स्वशासन-पर गृह मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि No such proposal is under consideration of the Ministry at present. अर्थात फिलहाल केंद्र सरकार के विचाराधीन ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।
स्थानीय निकाय महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे विधानसभा या Territorial Council का विकल्प नहीं: सांसद उमेश पटेल
इस संबंध में सांसद उमेश पटेल ने कहा कि पंचायत और नगरपालिका लोकतंत्र की महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं, लेकिन उनका कार्यक्षेत्र मुख्यत: स्थानीय स्तर तक सीमित है। पूरे केंद्र शासित प्रदेश की नीतियों, बड़ी विकास परियोजनाओं, बजट प्राथमिकताओं और महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की संस्थागत भागीदारी के लिए एक प्रभावी मंच की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग किसी संस्था के विरोध में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करने की है। दादरा नगर हवेली और दमण-दीव की जनता को अपने प्रदेश के महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विकास संबंधी निर्णयों में अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से अधिक प्रभावी आवाज मिलनी चाहिए। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि सरकार ने फिलहाल प्रस्ताव विचाराधीन न होने की बात कही है, लेकिन इससे इस विषय की आवश्यकता समाप्त नहीं होती। वे ळी११्र३ङ्म१्रं’ / ऊी५ी’ङ्मस्रेील्ल३ अि५्र२ङ्म१८ उङ्म४ल्लू्र’, निर्वाचित प्रतिनिधियों की अधिक भागीदारी तथा राज्यसभा प्रतिनिधित्व सहित अधिक लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को आगे भी उचित संवैधानिक एवं संसदीय मंचों पर उठाते रहेंगे।

