असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण 07 अगस्त। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण दमण और एडवोकेट्स बार एसोसिएशन दमण के सहयोग से आज सुबह 9.30 बजे दमण महाविद्यालय में कानूनी साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें कॉलेज के विद्यार्थियों को कानूनी जानकारी दी गई। इस अवसर पर आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में इंचार्ज को-मेंबर सेक्रेटरी, सिविल जज एवं सीजेएम दमण श्री ओमकार जे. कुलकर्णी ने विद्यार्थियों और उपस्थित नागरिकों को कानून के महत्व एवं विभिन्न कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि समाज को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाए रखने के लिए कानून का होना अत्यंत आवश्यक है। यदि समाज में कानून न हो तो अराजकता फैल जाएगी और लोगों के अधिकारों की रक्षा करना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कानून केवल अपराधियों को दंडित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने का प्रभावी साधन भी है। अधिवक्ता मयंक पटेल ने कानूनी जानकारी देते हुए कहा कि स्वास्थ्य अधिकार के तहत प्रत्येक नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार है। वहीं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए सरकार शिक्षा, छात्रवृत्ति, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसी अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित करती है। स्किल इंडिया मिशन और डिजिटल स्किल ट्रेनिंग के माध्यम से युवाओं को रोजगारपरक एवं तकनीकी कौशल प्रदान किए जाते हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री वन धन योजना जनजातीय समुदायों को लघु वनोपज के संग्रह, प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अधिवक्ता अल्पा मोदी ने एंटी रैगिंग कानून के बारे में बताया कि भारत में रैगिंग एक गंभीर आपराधिक और दंडनीय अपराध है। यूजीसी के दिशा-निर्देशों और आपराधिक कानूनों के अनुसार, शिक्षण संस्थानों के अंदर या बाहर किसी भी नए छात्र के साथ मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न, दुर्व्यवहार या अपमान करना कानूनन सख्त वर्जित है और इसके लिए जेल एवं भारी जुर्माने का प्रावधान है। भारतीय न्याय संहिता और राज्य के विशेष एंटी-रैगिंग कानूनों के तहत मारपीट, धमकी और उत्पीड़न के मामलों में सीधी एफआईआर दर्ज होती है। जिसमें कॉलेज से निष्कासन, निलंबन, छात्रवृत्ति रोकना या प्रवेश रद्द करना एवं दोषी पाए जाने पर 25,000 से लेकर 1 लाख तक का भारी जुर्माना शामिल हैं। इसमें संस्थानों की जिम्मेदारी है कि शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर पुलिस में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। वहीं अधिवक्ता पूनम देसाई ने बताया कि भारत में दहेज निषेध अधिनियम 1961 के तहत दहेज लेना, देना या इसके लिए विवश करना गंभीर कानूनी अपराध है। इस कानून के उल्लंघन पर कम से कम 5 वर्ष की कैद और 15,000 रुपये या दहेज की राशि के बराबर जुर्माना हो सकता है। महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक होना समाज के लिए आवश्यक है। अंत में अधिवक्ता मिलन पटेल ने नालसा की डॉन योजना के तहत नशामुक्त भारत अभियान पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभाव, उनसे बचाव के उपाय तथा मादक पदार्थों से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कॉलेज की ओर से प्रोफेसर नेहा मिश्रा ने कॉलेज में कानूनी साक्षरता कार्यक्रम आयोजित किये जाने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के प्रति आभार जताया। उन्होंने उपस्थित छात्रों को मिली जानकारी का सही इस्तेमाल करने और भविष्य के लिए लाभदायी बनाने की बात कही। उन्होंने बताया कि हम सभी के लिए ही यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के माध्यम से हमें विभिन्न कानूनी जानकारी उपलब्ध हुई है।

