नई दिल्ली(ईएमएस)। देश की संसद में मंगलवार को एक अनूठा नजारा देखने को मिला, जब लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर बहस के दौरान सांसदों का अंदाज पूरी तरह बदल गया। संसद के भीतर गंभीर मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ जेन ज़ी यानी आज की युवा पीढ़ी के बीच लोकप्रिय ट्रेंडिंग स्लैंग्स की भी जबरदस्त गूंज सुनाई दी। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही ओर से सांसदों ने युवाओं से जुड़ने और एक-दूसरे पर राजनीतिक तंज कसने के लिए सोशल मीडिया पर चर्चित इन नए शब्दों का जमकर इस्तेमाल किया। इससे सदन का माहौल कई बार हल्का-फुल्का और दिलचस्प हो गया।
एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा करते हुए सत्तारूढ़ गठबंधन ने इसे परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि विपक्षी दलों ने इसे सरकार की नाकामी छिपाने का प्रयास करार दिया। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्षी नेता पहले मिया (गायब) रहे, फिर उन्हें फोमो (पीछे छूट जाने का डर) हुआ और अंत में वे डेलुलु (भ्रम) का शिकार हो गए कि युवा उनके साथ खड़े हैं। वहीं, बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने सरकार की नीति का बचाव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने नीतिगत शून्यता को खत्म कर मामले को क्लोक्ड इट (सटीक समाधान निकाला) किया है। तेजस्वी सूर्या ने भी विपक्ष के दावों को युवाओं का भ्रम यानी डूलुलु करार दिया। दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने युवा प्रदर्शनकारियों का पक्ष रखते हुए उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए गीतों और मीम्स के संदर्भ में वास्तेगुनेहुईया और कुचु-पुचु जैसे शब्दों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युवाओं ने बेहद शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखा और सरकार से इस्तीफा मांगा था। हालांकि, बहस में इन शब्दों के लगातार प्रयोग पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने नाराजगी जताई। उन्होंने सभी सदस्यों को मुद्दे की संवेदनशीलता की याद दिलाते हुए कहा कि यह बहस ऑक्सफोर्ड ऑनलाइन डिक्शनरी की कोई प्रतियोगिता नहीं है। उन्होंने कहा कि सांसदों को भाषा के खेल में उलझने के बजाय देश के करोड़ों छात्रों और उनके भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

