असली आजादी न्यूज नेटवर्क, वलसाड, 22 जुलाई। वलसाड जिले में पिछले तीन दिनों से जारी मुशलाधार बारिश के कारण हर तरफ जलमग्न जैसी स्थिति पैदा हो गई है। भारी आफत के चलते जिले में मानसून सीजन की बारीश हाफ सेंचुरी को पार हो चुकी है, जिसके बाद प्रशासन को पूरी तरह हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के आंकडों के अनुसार, 21 जुलाई तक जहां सीजन की कुल बारिश 47.86 इंच थी, वहीं पिछले 24 घंटों में यह बढ़कर सीधे 57.69 इंच यानि की 1442.29 मिमी तक पहुंच गई है। भारतीय मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बाद रात से ही जिले की सभी नदियां दोनों किनारों पर उफान के साथ बह रही हैं और ग्रामीण इलाकों के तालाब ओवरफ्लो हो गए हैं। इस भीषण स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर नितिन सांगवान ने खुद पुलिस, नगरपालिका और एनडीआरएफ की टीमों के साथ प्रभावित निचले इलाकों का दौरा कर ग्राउंड जीरो पर राहत एवं बचाव कार्यों की कमान संभाल ली है। जिले में बारिश का पैटर्न अलग-अलग इलाकों में बेहद आक्रामक और विनाशकारी रहा। जहां 21 जुलाई की शाम 6 बजे से अगले 12 घंटों के दौरान रात के समय कपराडा तालुका में सबसे ज्यादा 12 इंच (299 मिमी) पानी बरसा, वहीं बुधवार को दिन के समय वलसाड तालुका में मात्र 10 घंटों के भीतर 10 इंच (243 मिमी) मूसलाधार बारिश दर्ज की गई। वलसाड शहर में हर दो घंटे में करीब दो-दो इंच पानी गिरने से तीथल रोड और अब्रामा की कई रिहायशी सोसायटियों में पानी भर गया। औरंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर आने के कारण सुरक्षा के लिहाज से काश्मीरा नगर के निचले इलाकों से करीब 250 से 300 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शफ्टि किया गया है, जिनके रहने और भोजन की व्यवस्था रामलल्ला हॉल में की गई है। इसके अलावा पालीहिल के पीछे बने एसटीपी प्लांट में बाढ़ के पानी के बीच फंसे तीन मजदूरों को एनडीआरएफ की टीम ने समय रहते सुरक्षित बाहर निकाला। पारडी तालुका के निचले गांवों जैसे कुंभारिया, पलसाणा, तीघरा, बगवाडा, उमरसाडी और आमली से भी कुल 103 लोगों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें कम्युनिटी हॉल और प्राथमिक स्कूलों में बने आश्रय स्थलों में ठहराया गया है। इस भारी बारिश का सबसे बडा असर जिले के यातायात और परिवहन तंत्र पर पडा है। बाढ़ के पानी के भराव और पुलों के ऊपर से पानी बहने के कारण जिले के कुल 326 मुख्य मार्ग वाहनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं, जिनमें पंचायत विभाग के अधीन आने वाली 313 और राज्य सरकार की 13 सडकें शामिल हैं। लोक नर्मिाण विभाग के कार्यपालक अभियंता भावेश पटेल ने जनता से अपील की है कि जब तक पानी का स्तर सामान्य न हो, बंद रास्तों से गुजरने का जोखिम न उठाएं और लगाए गए बैरिकेड्स को न हटाएँ। सडकों के साथ-साथ रेल यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पारडी तालुका के खडकी गांव के पास भारी बारिश के चलते रेलवे ट्रैक के नीचे की मट्टिी बह गई, जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य शुरू किया, लेकिन इस दौरान कई ट्रेनों की आवाजाही पर असर देखने को मिली। इस प्राकृतिक आपदा के बीच कई दुर्घटनाएं और प्रशासनिक लापरवाही के मामले भी सामने आए हैं। धरमपुर तालुका के बोपी गांव के पास उफनते कॉजवे पर प्रशासन द्वारा की गई बैरिकेडिंग को नजरअंदाज कर एक कार चालक निकुंजकुमार म्त्रिरी ने गाडी निकालने की कोशिश की। देखते ही देखते कार पानी के तेज बहाव में बहने लगी, जिसके बाद चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए खिडकी से कूदकर अपनी जान बचाई, हालांकि उसकी कार और मोबाइल पानी में बह गए। वहीं दूसरी ओर, धरमपुर के प्रसद्धि वल्सिन हिल मुख्य मार्ग पर भारी भूस्खलन की घटना घटी, जिससे सडक का एक बडा हस्सिा ढह गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इसके अतिरक्ति, गुजरात-महाराष्ट्र सीमा पर स्थित बेहद अंदरूनी खोबा गांव के प्राथमिक स्कूल की प्रोटेक्शन वॉल नदी के तेज बहाव और लगातार बारिश के कारण ताश के पत्तों की तरह ढह गई। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय विधायक अरविंद पटेल और अग्रणी नेता गणेशभाई ने दोनों आपदा स्थलों का दौरा किया। उन्होंने वल्सिन हिल मार्ग की मरम्मत करने और खोबा स्कूल की सुरक्षा दीवार का युद्ध स्तर पर पुनर्नर्मिाण शुरू करने के कडे आदेश दिए।

