नई दिल्ली में भगवान बिरसा मुंडा जी के 150वें जयंती वर्ष पर आयोजित हुआ ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’
– पहली आदिवासी राष्ट्रपति से लेकर राज्यों में आदिवासी मुख्यमंत्री तक-मोदी Era जनजातीय गौरव का स्वर्णिम काल:गृह मंत्री अमित शाह
– PESA अब कागज पर नहीं, जमीन पर-पेसा सेल से आदिवासी की अपनी भाषा में, गाँव-गाँव पहुँच रहा कानून: गृह मंत्री शाह
– दादरा नगर हवेली की आदिवासी सांसद कला डेलकर, वलसाड के आदिवासी सांसद धवल पटेल सहित पूरे देश के आदिवासी सांसदों, नेताओं, अग्रणियों की उपस्थिति रही
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में भगवान बिरसा मुंडा जी के 150वें जयंती वर्ष पर आयोजित ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया।
अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि यह समागम जनजातियों के महाकुंभ के रूप में आने वाले अनेक वर्षों तक जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि यह भगवान बिरसा मुंडा के बाद सबसे पहला यह जनजातीय आंदोलन है जो पूरे देश को एक करता है। उन्होंने कहा कि यह वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का वर्ष है। उन्होंने कहा कि उलगुलान आंदोलन ने अंग्रेज़ों को धूल चटाने का काम किया था और उस वक्त संचार की सुविधा न होने के बावजूद झारखंड से गुजरात तक पूरे भारत में जनजातियों को भगवान बिरसा मुंडा ने यह संदेश पहुंचाया कि हमारा धर्म ही सच्चा धर्म है और हमारे जंगल पर किसी का कब्ज़ा नहीं हो सकता। जल, जंगल, पहाड़ हमारे वनवासी भाइयों के लिए आस्था का केन्द्र, आजीविका का साधन और उनकी अस्मिता औऱ संस्कृति का संरक्षण करने वाला अभेद्य किला है। आज सबसे बड़ा सस्टेनेबल मॉडल जनजातियों द्वारा बनाया गया मॉडल है।
श्री अमित शाह ने कहा कि सभी जनजातियों ने किसी लिखित नियम के बिना विविधता में एकता और एकता में विविधता के मंत्र को चरितार्थ करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने हर व्यक्ति को अपने मूल धर्म में सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया है। लोभ, लालच और जबरदस्ती कोई किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता। उन्होंने कहा कि वनवासी अगर ठान लें कि धर्म की रक्षा करने का संकल्प आज यहां लेना है तो यही संकल्प हमें हमारी संस्कृति औऱ देश से जोड़कर रखेगा। श्री शाह ने कहा कि हमारे बीच भेद पैदा करने वाले नहीं जानते कि हज़ारों साल पहले भगवान राम ने शबरी के झूठे बेर खाकर हमें बताया था कि हम सब एक हैं। उन्होंने कहा कि भेद पैदा करने वाले लोगों के लिए आज का यह सम्मेलन और लाखों की संख्या में उपस्थिति जनजातियां बहुत बड़ा संदेश हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अब एक षड्यंत्र शुरू हुआ है कि वउउ जनजातियों को अपनी संस्कृति, परंपरा, परंपरा से जीने के अधिकार से वंचित कर देगा। मोदी सरकार के गृह मंत्री के नाते मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि वउउ की कोई पाबंदी वनवासी समाज पर नहीं लगेगी और इससे किसी वनवासी के किसी भी अधिकार का अतिक्रमण नहीं होगा। हमने गुजरात और उत्तराखंड में वउउ लागू किया है और विशेष प्रावधान कर वउउ से सारी जनजातियों को बाहर रखने का काम नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है। श्री शाह ने कहा कि मैं भेद पैदा करने वालों को बताना चाहता हूं कि वउउ से किसी भी जनजाति की परंपरा से कोई खिलवाड़ नहीं होगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि जिस नक्सली हिंसा ने 40 हज़ार से अधिक जनजातीय जानें ली, मोदी सरकार ने 5 दशक पुराने उस नासूर नक्सलवाद को समाप्त कर दिया है और आज हमारा देश नक्सल समस्या से पूर्ण रूप से मुक्त हो गया है। जो लोग वनवासी समाज और जनजातियों का विकास रोककर बैठे थे, उन्हें हम समाप्त कर चुके हैं। एक ज़माने में नक्सलियों से लड़ने के लिए जहां सुरक्षाबलों के कैंप लगे थे, उनमें से 70 कैंपों को शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जनसुविधा केन्द्र बदलने का काम नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि अब समय है जनजातीय क्षेत्रों के पहाड़ों, जंगलों मे विकास पहुंचाने का। हमारी पार्टी हमेशा से जनजाति कल्याण को प्राथमिकता देती रही है। अटल जी ने जनजाति कल्याण मंत्रालय बनाकर जनजातियों के विकास की शुरूआत की और प्रधानमंत्री मोदी जी ने उसे आगे बढ़ाया है। हाल ही में हुए बंगाल के चुनाव में सभी 16 ट्राइबल रिज़र्व सीटें हमारी पार्टी ने जीती है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने जनजाति कल्याण को आगे बढ़ाने का काम किया है। पिछली सरकार के समय जनजातियों के कल्याण का कुल बजट 28 हज़ार करोड़ रूपए था, जिसे प्रधानमंत्री मोदी जी ने बढ़ाकर 1 लाख 50 हज़ार करोड़ रूपए कर दिया है। मोदी सरकार जनजातियों के कल्याण के प्रति समर्पित सरकार है। इस कार्यक्रम में दादरा नगर हवेली की आदिवासी सांसद कला डेलकर, वलसाड के आदिवासी सांसद धवल पटेल सहित पूरे देश के आदिवासी सांसदों, नेताओंे, अग्रणियों की उपस्थिति रही।

