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पातलिया चेकपोस्ट पर पुलिस एवं एक्साइज कर्मियों पर हमला मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को रखा बरकरार, तीनों आरोपियों को सजा

– पुलिसकर्मी के साथ मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का था मामला

असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण 31 अगस्त। पातलिया चेकपोस्ट पर ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी और एक्साइज गार्ड के साथ मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा डालने तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराया गया, जबकि एक आरोपी को पूर्व में बरी कर दिया गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 28 अक्टूबर की रात करीब 2.30 बजे पातलिया चेकपोस्ट पर हुई थी। उस समय चेकपोस्ट पर विजय ईश्वर हलपति पुलिस कांस्टेबल, एक्साइज गार्ड अशोक पटेल तथा जगदीश मिटना ड्यूटी पर तैनात थे। बताया गया कि गुजरात पुलिस एक कार नंबर डीडी-03-एच-2705 का पीछा करते हुए दमण क्षेत्र में पहुंची थी। इसके बाद गुजरात पुलिस वहां से लौट गई। आरोप है कि इसके बाद भद्रेश अरविंद पटेल ने अन्य के साथ ड्यूटी पर तैनात विजय ईश्वर हलपति के साथ गाली-गलौज करने, पुलिसकर्मी के साथ पुलिस के डंडे से मारपीट की। घटना के दौरान आरोपियों ने एक्साइज गार्ड को दौड़ाया और चेकपोस्ट के केबिन का कांच तोड़कर सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया। उक्त उपद्रवियों पर गाली-गलौज करने, पुलिसकर्मी के साथ पुलिस के डंडे से मारपीट करने तथा सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया गया। इस मामले में शिकायतकर्ता विजय ईश्वर हलपति की शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 186, 353, 332, 341, 504 और 506(2) सहित पीडीपी एक्ट की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच के दौरान 21 जनवरी 2017 को चार्जशीट दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान डॉक्टर का प्रमाणपत्र सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए। मामले में डॉक्टर का प्रमाणपत्र के साथ कुल 10 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मामले की सुनवाई के दौरान तत्कालीन जांच अधिकारी द्वारा की गई जांच के आधार पर प्रकरण न्यायालय में चला। जिस पर निचली अदालत ने 4 मई 2019 को अपना फैसला सुनाते हुए विभन्नि धाराओं के तहत तीन आरोपियों भद्रेश अरविंद पटेल, अंकित नानू पटेल, सिद्धार्थ दीपक पटेल को दोषी ठहराया, जबकि विशाल सुमन पटेल को बरी कर दिया गया। नामदार कोर्ट ने धारा 186 के तहत तीन महीने की सजा और 3,000 रुपये का जुर्माना, धारा 341 में 1 महीने, जबकि धारा 332 के तहत दो वर्ष की सजा सुनाई गई। इसके अलावा पीडीपी एक्ट के तहत दो महीने की सजा भी दी गई। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दोषियों द्वारा सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई थी। हालांकि, सत्र न्यायालय ने मामले के साक्ष्यों और रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए दोषसिद्धि की पुष्टि कर दी। मामले में सरकारी पक्ष की ओर से सरकारी लोक अभियोजक हरिओम उपाध्याय ने जोरदार पैरवी की। सरकारी पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और प्रभावी दलीलों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा गया। बताया जाता है कि आरोपी कथित रूप से शराब के अवैध कारोबार (बूटलेगिंग) से जुड़े हुए थे। इस मामले में न्यायालय के फैसले को सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने वाले मामलों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

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