- एसआईआर प्रक्रिया के बाद स्थानीय मतदाताओं के हाथों में आ चुकी है सत्ता की चाबी
- दमण-दीव लोकसभा से 40 हजार से ज्यादा और दादरा नगर हवेली से 80 हजार से ज्यादा परप्रांतीय मतदाताओं के नाम कटे: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, ओडिशा सहित दक्षिण भारत के राज्यों के मतदाताओं ने अपने-अपने राज्यों में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पूरी कर अपने वतन की मतदाता सूची में अपना-अपना नाम कायम रखा
- दमण-दीव लोकसभा सीट पर कोली पटेल, आदिवासी, माछीमार, माह्यावंशी, मिटना, मांगेला, भंडारी, खारवा, कोली-माछीमार सहित स्थानीय मतदाता ही अब निर्णायक
- दादरा नगर हवेली लोकसभा सीट पर आदिवासी मतदाता 60 प्रतिशत के पार: आदिवासी समाज की ही अब रहेगी निर्णायक भूमिका
- केन्द्रशासित प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव में अब तक पंचायत से लेकर पार्लामेंट तक परप्रांतीय मतदाता की रहती थी निर्णायक भूमिका
- केंद्रशासित प्रदेश थ्रीडी से अपने-अपने वतन की मतदाता सूची में अपना नाम रखने के पीछे परप्रांतीय मतदाताओं का तर्क: हमारे गांव में हमारे वोट की अहमियत यहाँ से ज्यादा है
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण, 14 अक्टूबर। पूरे देश में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को लेकर हल्लाबोल के बीच केंद्रशासित प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव के स्थानीय नागरिकों के लिए एसआईआर प्रक्रिया वरदान साबित हुई है। एसआईआर प्रक्रिया में दमण-दीव लोकसभा सीट से 40000 से ज्यादा और दादरा नगर हवेली लोकसभा सीट से 80000 से ज्यादा परप्रांतीय मतदाताओं के नाम कट चुके हैं। हालांकि केंद्रशासित प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव में बसने वालें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, ओडिशा सहित दक्षिण भारत के राज्यों के मतदाताओं ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अपने-अपने मूल वतन की ही मतदाता सूची में अपना-अपना नाम कायम रखने का मन बना लिया था। जिसके कारण हजारों परप्रांतीय मतदाताओं ने इस प्रदेश में चल रही एसआईआर प्रक्रिया से अपने आप को अलग रखा। साथ ही साथ उन्होंने अपने-अपने राज्यों एवं गांवों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया में शामिल होकर अपने-अपने नाम अपने-अपने गांव या शहर में ही दर्ज करवा के रखा। जिसके कारण दमण-दीव लोकसभा सीट से 40000 से ज्यादा परप्रांतीय मतदाता एवं दादरा नगर हवेली लोकसभा सीट से 80000 मतदाताओं के नाम कट गये। एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों लोकसभा सीटों की फाइनल मतदाता सूची जारी हो चुकी है। जानकारों की मानें तो दमण-दीव लोकसभा सीट पर कोली पटेल, आदिवासी, माछीमार, माह्यावंशी, मिटना, मांगेला, भंडारी, खारवा, कोली-माछीमार सहित स्थानीय मतदाता एवं दादरा नगर हवेली लोकसभा सीट पर आदिवासी मतदाता अब निर्णायक बन चुके हैं। बता दें कि 1996 से 2024 तक पंचायत से लेकर पार्लामेंट तक के चुनावों में परप्रांतीय मतदाता ही निर्णायक भूमिका में रहे हैं। जिसके कारण कुछ राजनीतिक दल स्थानीय मतदाताओं को ज्यादा तवज्जों नहीं दे रहे थे। उन्हें लगता था कि हम स्थानीय मतदाताओं को दरकिनार कर परप्रांतीय मतदाताओं के भरोसे सीट निकाल देंगे। लेकिन अब एसआईआर प्रक्रिया के बाद स्थानीय मतदाताओं के हाथों में सत्ता की चाबी आ चुकी है। अब पंचायत सदस्य से लेकर सरपंच, जिला पंचायत सदस्य से लेकर सांसद तक स्थानीय मतदाताओं के आशीर्वाद के बिना चुनाव जीत ही नहीं सकते। दूसरे शब्दों में कहे तो एसआईआर ने केंद्रशासित प्रदेश के हजारों स्थानीय नागरिकों को फिर एक बार 1996 के पहले की स्थिति में ला दिया है। अब सभी राजनीतिक दलों को स्थानीय नागरिकों की भावनाओं को समझना होगा, स्थानीय नागरिकों की समस्याओं एवं अपेक्षाओं को तवज्जों देना होगा, तभी स्थानीय मतदाताओं का आशीर्वाद उस राजनीतिक दल को मिलेगा।

