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सांसद उमेश पटेल ने लोकसभा में संघ प्रदेश थ्रीडी के 2 महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया

– सांसद उमेश पटेल ने सहकारिता मंत्रालय से स्थानीय सहकारी संस्थाओं में वर्षों से लंबित लोकतांत्रिक चुनावों एवं प्रशासकों के माध्यम से संचालन का मुद्दा उठाया – सांसद ने पंचायती राज मंत्रालय से ग्राम पंचायतों, नगर परिषदों एवं नगरपालिकाओं में वर्षों से कार्यरत एमटीएस, स्वच्छता कर्मियों, संविदा, आउटसोर्स एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या, उनकी सेवा स्थिति तथा 5 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा संसद में उठाया

असली आजादी न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली 21 जुलाई। दमण-दीव के सांसद उमेश पटेल ने आज लोकसभा में दो महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों को अलग-अलग मंत्रालयों के समक्ष अतारांकित प्रश्न (वल्ल२३ं११ीि द४ी२३्रङ्मल्ल) के माध्यम से प्रभावी ढंग से उठाया। सांसद उमेश पटेल द्वारा पहले प्रश्न के माध्यम से सहकारिता मंत्रालय का ध्यान दमण एवं दीव की सहकारी संस्थाओं में लंबे समय से लोकतांत्रिक चुनाव न होने तथा प्रशासकों के माध्यम से संस्थाओं के संचालन की ओर आकर्षित किया गया। सरकार ने अपने उत्तर में स्वीकार किया कि दमण एवं दीव स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड तथा महाकालेश्वर फिशरीज को-ऑपरेटिव सोसायटी एवं श्री महासागर फिशरीज को-ऑपरेटिव सोसायटी में प्रशासक नियुक्त हैं तथा चुनाव अब तक नहीं कराए गए हैं। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि सहकारी संस्थाओं की आत्मा लोकतांत्रिक चुनाव हैं। यदि वर्षों तक प्रशासक ही संस्थाओं का संचालन करते रहें तो सदस्यों के अधिकार एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था दोनों प्रभावित होती हैं। उन्होंने समयबद्ध चुनाव कराकर निर्वाचित प्रबंधन समितियों को कार्यभार सौंपने की आवश्यकता पर बल दिया। इसी दिन सांसद उमेश पटेल ने पंचायती राज मंत्रालय के समक्ष दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हुए दादरा नगर हवेली तथा दमण-दीव की ग्राम पंचायतों, नगर परिषदों एवं नगरपालिकाओं में कार्यरत एमटीएस स्वच्छता कर्मियों एवं अन्य अस्थायी कर्मचारियों की स्थिति पर विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने सरकार से पूछा कि वर्तमान में कितने कर्मचारी नियमित, संविदा, आउटसोर्स एवं दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत हैं तथा इनमें से कितने कर्मचारी पांच वर्ष से अधिक समय से अस्थायी रूप से सेवाएँ दे रहे हैं। साथ ही यह भी जानना चाहा कि इतने लंबे समय तक नियमितीकरण न होने के कारण क्या हैं तथा सरकार इस संबंध में क्या कदम उठा रही है? सांसद उमेश पटेल ने कहा कि स्थानीय स्वराज संस्थाओं की रीढ़ उनके कर्मचारी होते हैं। वर्षों तक सेवा देने के बावजूद यदि कर्मचारी अस्थायी बने रहते हैं तो यह उनके साथ न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने योग्य एवं लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण की दिशा में ठोस नीति बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संसद में इन दोनों विषयों को उठाने का उद्देश्य केवल जानकारी प्राप्त करना नहीं, बल्कि स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करना, सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा स्थानीय स्वराज संस्थाओं के कर्मचारियों को न्याय दिलाना है।

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