– दो महीने पहले भी कंपनी को नोटिस भेजकर दी थी चेतावनी, फिर भी नहीं किया सुधार ल्ल बिजली कनेक्शन काटा और कंपनी को भी किया गया सील ल्ल जल अधिनियम 1974 और वायु अधिनियम 1981 के तहत गैर-अनुपालन के चलते कंपनी को बंद करने का जारी किया गया निर्देश – प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा बांसवाडा गारमेंट्स पर की गई कार्रवाई: दूसरी कंपनियों के लिए चेतावनी
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण 25 अगस्त। दमण की बांसवाडा गारमेंट्स को भारी मात्रा में वायु प्रदूषण फैलाना उस समय भारी पड गया जब संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव के प्रदूषण नियंत्रण समिति ने कार्रवाई करते हुए भारी भरकम जुर्माना लगाया है। प्रदूषण नियंत्रण समिति ने पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामले में बांसवाडा सिंटेक्स लिमिटेड की कडैया स्थित इकाई के खिलाफ कार्रवाई की है। दमण के कडैया में चल रही बांसवाडा गारमेंट्स की इस इकाई को जल अधिनियम 1974 और वायु अधिनियम 1981 के तहत गैर-अनुपालन के चलते 18 अगस्त 2026 को बंद करने का निर्देश जारी किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण समिति ने 2 महीने पहले भी नोटिस भेजकर कंपनी को वायु प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का सख्ती से अनुपालन करने की हिदायत दी थी, लेकिन बांसवाडा गारमेंट्स ने प्रदूषण नियंत्रण समिति के आदेश को अनदेखा कर दिया और सुधार नहीं किया। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण समिति ने ठोस कदम उठाते हुए बांसवाडा गारमेंट्स के खिलाफ जल अधिनियम 1974 और वायु अधिनियम 1981 के तहत गैर-अनुपालन के सख्त कार्रवाई की है। प्रदूषण नियंत्रण समिति के आदेश के अनुसार, कंपनी को 1 करोड़ 47 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करना होगा। मुआवजा जमा करने के बाद ही बिजली कनेक्शन बहाल किया जाएगा। इसके अलावा इकाई को पर्याप्त क्षमता वाला एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (अढउऊ) स्थापित कर उसे पूरी उत्पादन प्रक्रिया के दौरान चालू रखना होगा। निर्धारित स्टैक उत्सर्जन मानकों का सख्ती से पालन करते हुए नियमित उत्सर्जन निगरानी और रिकॉर्ड भी रखना होगा। प्रदूषण नियंत्रण समिति जल और वायु प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के तहत औद्योगिक इकाइयों के पर्यावरणीय अनुपालन की निगरानी करती है। प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा बांसवाडा गारमेंट्स के खिलाफ की गई कार्रवाई दूसरी कंपनियों के लिए चेतावनी है।
दानह-दमण के उद्योगों के लिए चेतावनी: चवन्नी बचाने के चक्कर में बांसवाडा गारमेंट को अब रूपया खर्च करना पडेगा!!
संघ प्रदेश थ्रीडी की प्रदूषण नियंत्रण समिति समय-समय पर उद्योगों को जल, वायु और ध्वनी प्रदूषण के बारे में चेतावनी जारी करती है। लेकिन बांसवाडा गारमेंट जैसे उद्योग प्रदूषण नियंत्रण समिति की चेतावनी को दरकिनार करके धडल्ले से प्रदूषण फैलाना जारी रखते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जून महीन में पीसीसी ने बांसवाडा गारमेंट को वायु प्रदूषण रोकने के लिए एक संयंत्र लगाने का निर्देश दिया था। बताया जाता है कि इसकी कीमत 15 से 20 लाख रूपये होगी लेकिन बांसवाडा गारमेंट के प्रबंधन ने इस राशि को बचाने के लिए निर्देश की अवहेलना कर अपना उत्पादन वायु प्रदूषण के साथ जारी रखा। बांसवाडा गारमेंट यह भी भूल गया कि उसकी कंपनी के महज 500 मीटर पर जवाहर नवोदय विद्यालय है जिसमें बडी संख्या में बच्चे पढाई करते हैं और निवास भी करते हैं। इस प्रकार के वायु प्रदूषण का नजदीक के क्षेत्र में ज्यादा बुरा प्रभाव पडता है। प्रदूषण नियंत्रण समिति के संज्ञान में यह बात आई की जून महीने से बांसवाडा गारमेंट को वायु प्रदूषण रोकने के लिए संयंत्र लगाने के निर्देश दिया था लेकिन उनके द्वारा अभी तक संयंत्र नहीं लगाया गया है और वायु प्रदूषण फैलाना जारी रखा है तो विभाग की ओर से तत्काल प्रभाव से एक सप्ताह पहले कंपनी को बंद करने का नोटिस दे दिया। साथ ही साथ 1 करोड 47 लाख रूपये का जुर्माना भी ठोक दिया। यहां वो कहावत सटीक बैठती है कि चवन्नी बचाने के चक्कर में रूपया खर्च हो गया। अब कंपनी को 1 करोड 47 लाख रूपये का जुर्माना तो चुकाना ही है साथ ही साथ संयंत्र लगाने का खर्च भी तो करना ही है। बांसवाडा गारमेंट पर हुई कार्रवाई दादरा नगर हवेली और दमण की उन कंपनियों के लिए सबक है जो पीसीसी के निर्देश को चवन्नी बचाने के चक्कर में मानते नहीं है बाद में कंपनी बंद करने और लाखों रूपये का जुर्माना भरने की नौबत आती है।

