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संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के हंगामे के बीच बोलने का अवसर नहीं मिलने पर सांसद उमेश पटेल ने जताई नाराजगी

असली आजादी न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली 30 जुलाई। लोकसभा में मानसून सत्र चल रहा है। जिसमें कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया जाना है और उस पर चर्चा करनी है। लेकिन संसद में लगातार सत्ता पक्ष और विपक्ष के हंगामे के बीच दमण-दीव के सांसद उमेश पटेल को बोलने का मौका नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई है। सांसद उमेश पटेल ने कहा है कि क्या संसद अब केवल मेजें थपथपाने तक ही सीमित रह गई है? लगातार सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के हंगामे के कारण आज फिर एक अत्यंत महत्वपूर्ण वन्दे मातरम् विधेयक बिना समुचित चर्चा के पारित हो गया। यह लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए चिंता का विषय है। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि संसद केवल विधेयक पारित करने का मंच नहीं, बल्कि हर विधेयक पर गंभीर, सार्थक और व्यापक चर्चा का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है। जब महत्वपूर्ण विधेयक बिना पर्याप्त बहस के पारित होते हैं, तो केवल सांसदों की आवाज़ नहीं दबती, बल्कि देश की जनता के विचार और अपेक्षाएं भी अधूरी रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों की जिम्मेदारी है कि संसद को गतिरोध का नहीं, संवाद का मंच बनाएं। राष्ट्रहित के विषयों पर राजनीति नहीं, चर्चा और सहमति सर्वोपरि होनी चाहिए। लोकतंत्र की आत्मा बहस, संवाद और जवाबदेही में है, केवल विधेयक पारित करने में नहीं। सांसद ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के हंगामे के चलते निर्दलीय सांसदों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पाता है। वहीं महत्वपूर्ण विधेयक पर अपने विचार भी प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं।

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