– विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर देशभर में होंगे विशेष कार्यक्रम, नई पीढ़ी को कराया जाएगा इतिहास के दर्दनाक अध्याय से अवगत
अहमदाबाद (ईएमएस)। भारत के इतिहास में 14 अगस्त का दिन वर्ष 1947 के देश विभाजन की उन दर्दनाक यादों से जुड़ा है, जिसने करोड़ों लोगों के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपने घर-बार छोड़ने पड़े, अनगिनत परिवार बिछड़ गए और असंख्य निर्दोष लोगों ने हिंसा में अपनी जान गंवाई। इस त्रासदी की पीड़ा, संघर्ष और बलिदान को स्मरण करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस वर्ष भी देशभर में इस अवसर पर संवेदनशील एवं प्रेरणादायी कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों का उद्देश्य विभाजन की भयावह घटनाओं के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करना, उनके संघर्षों को सम्मान देना तथा उस दौर की ऐतिहासिक स्मृतियों को जीवित रखना है। केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों द्वारा प्रदर्शनी, संगोष्ठी, विचार गोष्ठी, श्रद्धांजलि सभा, परिचर्चा और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं और नई पीढ़ी को देश विभाजन के वास्तविक इतिहास, उसके सामाजिक प्रभाव तथा उस समय लोगों द्वारा झेली गई कठिनाइयों से परिचित कराया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि विभाजन की त्रासदी केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि मानवता, सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण संदेश भी है। इसलिए इस दिवस के माध्यम से समाज में आपसी भाईचारा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा। विभाजन की विभीषिका से मिली सीख को स्मरण करते हुए देश की अखंडता, संप्रभुता और एकता को अक्षुण्ण बनाए रखने का सामूहिक संकल्प भी लिया जाएगा। विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में नागरिक भाग लेकर विभाजन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले लोगों तथा विस्थापन और हिंसा का दर्द झेलने वाले परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करेंगे।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह भविष्य की पीढि़यों को यह संदेश देने का भी माध्यम है कि घृणा, हिंसा और वैमनस्य की पुनरावृत्ति कभी न हो तथा देश सदैव शांति, सद्भाव, एकता और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ता रहे।

