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सांसद उमेश पटेल ने लोकसभा में उठाई दीव-वणाकबारा बंदरगाह की वर्षों पुरानी ड्रेजिंग समस्या

– सदन में हंगामे के कारण प्रस्तावित तीन महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल भी नहीं हो सके प्रस्तुत: सांसद उमेश पटेल

असली आजादी न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली 07 अगस्त। दमण-दीव के सांसद उमेश पटेल ने आज लोकसभा में अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास किया। एक ओर उन्होंने अतारांकित प्रश्न संख्या – 3224 के माध्यम से दीव पत्तन एवं वणाकबारा बंदरगाह की वर्षों से लंबित कैपिटल ड्रेजिंग परियोजनाओं में हो रही देरी का मुद्दा केंद्र सरकार के समक्ष रखा। वहीं दूसरी ओर तीन महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल के माध्यम से संसद की जवाबदेही, देशभर के संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के हित तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमण एवं दीव के सरकारी मेडिकल कॉलेज की फीस से जुड़े विषयों पर विधायी पहल की। सांसद उमेश पटेल ने पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय से पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या – 3224 के माध्यम से दीव पत्तन और वणाकबारा बंदरगाह की कैपिटल ड्रेजिंग परियोजनाओं में हो रही देरी पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि आवश्यक तकनीकी, प्रशासनिक एवं निविदा संबंधी प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद वित्तीय स्वीकृति अथवा निधि जारी नहीं होने के कारण सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत प्रस्तावित कैपिटल ड्रेजिंग परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। सांसद ने सरकार से पूछा कि वित्तीय स्वीकृति में विलंब के वास्तविक कारण क्या हैं, देरी के लिए जवाबदेही किस प्रकार तय की जाएगी तथा दोनों परियोजनाओं को शीघ्र वित्तीय स्वीकृति एवं निधि उपलब्ध कराने के लिए क्या समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाएगी? उमेश पटेल ने कहा कि यह केवल बंदरगाह के बुनियादी ढांचे का विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध स्थानीय मछुआरों की आजीविका, मछली पकड़ने वाली नौकाओं की सुरक्षित आवाजाही, बंदरगाह की कार्यक्षमता तथा दीव के आर्थिक विकास से जुड़ा हुआ है। वित्तीय स्वीकृति में अनावश्यक देरी से परियोजना लागत बढ़ने और पुन: निविदा अथवा पुनर्मूल्यांकन जैसी स्थितियां उत्पन्न होने का खतरा भी रहता है। इस विधेयक का उद्देश्य दादरा नगर हवेली और दमण-दीव के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषकर ढङ्म२३ ॠ१ंि४ं३ी (ढॠ) टी्रिूं’ उङ्म४१२ी२ की फीस को अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों के अनुरूप तर्कसंगत एवं किफायती बनाना है। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज का मूल उद्देश्य योग्य विद्यार्थियों को सुलभ चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए। फीस इतनी अधिक नहीं होनी चाहिए कि आर्थिक रूप से सामान्य एवं कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थी उच्च चिकित्सा शिक्षा से वंचित रह जाएं।
सदन में हंगामे के कारण महत्वपूर्ण विधेयक नहीं हो सके प्रस्तुत: सांसद उमेश पटेल ने कहा कि आज इन तीनों महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल को सदन में आगे बढ़ाने का अवसर था, लेकिन लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित होने और स्थगित हो जाने से दुर्भाग्यवश इन महत्वपूर्ण विषयों पर अपेक्षित संसदीय प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक सांसद के विधेयक के लंबित रहने का विषय नहीं है। इन विधेयकों के पीछे करोड़ों करदाताओं के पैसे की जवाबदेही, लाखों संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के भविष्य और हमारे प्रदेश के मेडिकल विद्यार्थियों को सस्ती शिक्षा जैसे जनहित के गंभीर प्रश्न जुड़े हुए हैं। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि संसद चर्चा, संवाद और जनहित के मुद्दों के समाधान का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है। जनता हमें सदन में हंगामा देखने के लिए नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं को उठाने और समाधान के लिए कानून बनाने के लिए चुनकर भेजती है। आज हमारे तीन महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल सदन की कार्यवाही बाधित होने के कारण आगे नहीं बढ़ सके, इसका मुझे अत्यंत दु:ख है। लेकिन इन मुद्दों पर हमारी लड़ाई और प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से दीव पत्तन एवं वणाकबारा बंदरगाह की कैपिटल ड्रेजिंग परियोजनाओं की लंबित वित्तीय प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कर शीघ्र निधि जारी करने की भी मांग की, ताकि वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे स्थानीय मछुआरों एवं नागरिकों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

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