असली आजादी न्यूज नेटवर्क, सिलवासा 08 जून। दादरा नगर हवेली में इन दिनों बढ़े हुए बिजली बिलों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। मई 2026 के बिल पहले के मुकाबले ज्यादा आने से कई परिवारों के घरेलू बजट पर असर पड़ा है। बिल हाथ में आते ही लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही उठ रहा है कि आखिर बिजली का खर्च अचानक इतना कैसे बढ़ गया। हालांकि राहत की बात यह है कि यह बढ़ोत्तरी हमेशा के लिए नहीं है। बिजली बिल में आई इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह FPPCA चार्ज है। FPPCA का पूरा नाम Fuel Price and Power Purchase Cost Adjustment है। आसान शब्दों में समझें तो जब बिजली बनाने, खरीदने और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की लागत बढ़ती है, तब उसका असर इस चार्ज के रूप में बिल में दिखाई देता है। स्थानीय जानकारों के अनुसार हाल ही में बिजली उत्पादक कंपनियों के नए टैरिफ आदेश लागू हुए हैं, जिससे बिजली खरीद की लागत बढ़ी है। इसके साथ ही केंद्रीय ट्रांसमिशन नेटवर्क के उपयोग पर अतिरिक्त खर्च भी जुड़ा है। इन दोनों कारणों से बिजली वितरण कंपनी का कुल खर्च बढ़ा और यही बोझ FPPCA के जरिए उपभोक्ताओं के बिल में समायोजित किया गया। यही वजह है कि मई 2026 के बिलों में बढ़ी हुई राशि नजर आ रही है। हालांकि उपभोक्ताओं के लिए समझना जरूरी है कि यह कोई नया टैक्स, जुर्माना या स्थायी शुल्क नहीं है। FPPCA एक परिवर्तनीय चार्ज है, जो परिस्थितियों के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है। पिछले महीनों के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। दिसंबर 2025 : -0.58 प्रतिशत, जनवरी 2026: -1.18 प्रतिशत, फरवरी 2026 : 0.44 प्रतिशत। इन आंकड़ों से साफ है कि FPPCA कभी बढ़ता है तो कभी घटता भी है। यानी फिलहाल जो बढ़ोतरी दिख रही है, वह भविष्य में कम भी हो सकती है। दरअसल, बिजली उत्पादन पर अंतर्राष्ट्रीय बाजार का सीधा असर पड़ता है। गैस, कोयला और अन्य ईंधनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव होने से बिजली उत्पादन लागत भी बदलती रहती है। जब ईंधन महंगा होता है, तो बिजली बनाना और खरीदना दोनों महंगा पड़ता है। ऐसे में वितरण कंपनी को होने वाला अतिरिक्त खर्च FPPCA के रूप में उपभोक्ताओं के बिल में दिखाई देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में कमी आती है और बिजली खरीद लागत घटती है, तो FPPCA भी नीचे आ सकता है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिलना तय है। फिलहाल दादरा नगर हवेली के उपभोक्ताओं के लिए जरूरी बात यही है कि बढ़ा हुआ बिल देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। यह स्थायी बढ़ोतरी नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार किया गया लागत समायोजन है। उम्मीद की जा रही है कि जैसे-जैसे बाजार स्थिर होगा, वैसे-वैसे बिजली बिल भी सामान्य स्तर पर लौट आएंगे।

