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शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के सीएम पद की ली शपथ

पश्चिम बंगाल में पहली बार बनी भाजपा की सरकार:”आमार सोनार बांग्ला अभियान शुरू

– शुभेंदु अधिकारी ने शपथ लेने के बाद पीएम मोदी को झुककर किया प्रणाम – शपथ समारोह में अमित शाह, एनडीए और बीजेपी शासित राज्यों के 20 सीएम मौजूद थे – पीएम मोदी ने बंगाल की भूमि और बंगाल की जनता को दंडवत प्रणाम किया – पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सबसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में से एक, माखनलाल सरकार का आशीर्वाद लिया – पीएम मोदी ने रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर पर पुष्पांजलि भी अर्पित की

कोलकाता,(ईएमएस)। शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में बीजेपी के पहले सीएम बन गए हैं। उन्होंने बांग्ला में ईश्वर के नाम की शपथ ली। शपथ के बाद शुभेंदु, पीएम मोदी के पास गए और उन्हें झुककर प्रणाम किया। बंगाल के गवर्नर आरएन रवि ने शुभेंदु के अलावा पांच और विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निषिथ प्रमाणिक का नाम शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, एनडीए और बीजेपी शासित राज्यों के 20 सीएम मौजूद थे। पीएम मोदी ने मंच पर रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी 165वीं जयंती पर श्रद्धाजंलि दी। इसके बाद पीएम ने मंच पर बीजेपी के 98 साल के कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का सम्मान किया। मंच पर आते ही पीएम मोदी सीधे सरकार के पास गए, उन्हें शॉल ओढ़ाया और फिर उनके पैर छुए। इसके बाद सरकार ने मोदी को गले लगाया। पीएम ने मंच पर बीजेपी के 90 साल के कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का सम्मान किया। पीएम मोदी परेड ग्राउंड में एक रोड शो कर रहे हैं। विशेष रूप से बनाए गए रथ पर पीएम और शुभेंदु साथ में मंच की तरफ गए। उनके साथ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य भी हैं। शपथ के दौरान ग्राउंड में करीब एक लाख लोग मौजूद रहे। पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, एनडीए और बीजेपी शासित राज्यों के 20 मुख्यमंत्री मौजूद हैं। पीएम ने मंच पर सबसे पहले रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धाजंलि दी। बता दें शुभेंदु बेहद आध्यात्मिक, घरवाले डरते थे बेटा संन्यासी न बन जाए 1970 में पूर्व मेदिनीपुर के कोंतली गांव में जन्मे शुभेंदु का बचपन से ही आस्था की ओर झुकाव है। हर शनिवार रामकृष्ण मिशन जाना उनका तय रूटीन था। वे बचपन में इतने धार्मिक थे कि घरवालों को डर लगने लगा था कहीं बेटा संन्यासी न बन जाए। घर में जमा सिक्के भी चुपचाप मिशन में दान कर आते थे। परिवार को लगता था, कभी भी घर छोड़ सकते हैं, लेकिन शुभेंदु ने दूसरा फैसला लिया…संन्यास नहीं, राजनीति करेंगे और शादी भी नहीं करेंगे। 80 के दशक के अंत में कांथी के प्रभात कुमार कॉलेज से शुभेंदु की छात्र राजनीति शुरू हुई। धीरे-धीरे पूर्व मेदिनीपुर में अपनी अलग पहचान बना ली।

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