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दीव में फुग्रो परिवार की कोहिनूर होटल के पास हस्तगत की गई 200 करोड रूपये की 3,87000 स्क्वेयर फीट जमीन मामले में एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में प्रशासन की जीत

असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण 01 मार्च। फुग्रो परिवार द्वारा पुर्तगालियों से आजादी के बाद दीव के किसानों को सरकार द्वारा दी गई जमीनों को अपने नाम चढाने के खिलाफ दीव प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई को एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (जिला अदालत दीव) ने सही ठहराते हुए फुग्रो परिवार द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। ज्ञात हो कि फुग्रो परिवार ने सरकार द्वारा जरूरतमंद नागरिकों और किसानों को दी गई कोहिनूर होटल के पास की 200 करोड रूपये की कीमत की 3,87000 स्क्वेयर फीट जमीन को इस होटल और कल्पना डिस्टलरी के नाम पर चढा दिया था। इस पूरी प्रक्रिया में बिना कलेक्टर की परमिशन के पूरा खेल खेला गया था। अगस्त 2016 में तत्कालीन संघ प्रदेश दमण-दीव की कमान संभालने के साथ प्रशासक प्रफुल पटेल ने प्रदेश में सरकारी जमीनों की स्थिति, गलत तरीके से सरकारी जमीनों को हडपने तथा अवैध कब्जे सहित के मामलों की सघन जांच शुरू कराई थी। दीव प्रशासन ने प्रशासक प्रफुल पटेल दिशानिर्देश एवं मार्गदर्शन में इसी मुहिम के अनुसार फुग्रो परिवार द्वारा दीव में अवैध तरीके से अपने नाम पर चढाकर कब्जाई हुई जमीनों के मामले में कार्रवाई शुरु की थी। इस कार्रवाई में कोहिनूर होटल के पास की 3,87000 स्क्वेयर फीट जमीन को प्रशासन ने फिर से श्री सरकार के नाम पर चढाते हुए ग्राउंड जीरो पर अफसरों को भेजकर सरकार के कब्जे में ले लिया था। प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ फुग्रो परिवार एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (जिला अदालत दीव) में चला गया था। दीव प्रशासन के वर्तमान अधिकारियों ने सबूतों के साथ सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल ने सभी साक्ष्यों एवं प्रशासनिक प्रक्रिया को उचित मानते हुए फुग्रो परिवार की याचिका को खारिज करते हुए प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाया है। एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल द्वारा घोषित फैसले से स्पष्ट है कि दीव प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई पूर्णत: कानूनी प्रक्रिया के तहत, पारदर्शी एवं जनहित में थी। एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के आदेश के पश्चात सरकारी जमीन पर से अवैध कब्जा जो हटाया गया था वह कानूनी तौर पर बिल्कुल उचित था, इस बात की पुष्टि हो गई है। दीव प्रशासन ने पुन: स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा एवं अनधिकृत निर्माण किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

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