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2029 के लोकसभा चुनाव में Gen-Z होंगे किंगमेकर:युवा पीढी के वोट होंगे निर्णायक

– 18 से 32 साल की युवा पीढ़ी के पास सत्ता की चाबी:हर चौथा वोट इसी वर्ग का होगा
– भाजपा-कांग्रेस-क्षेत्रीय दलों को बदलनी होगी अपनी-अपनी रणनीति: इस वर्ग को जिसने साथ कर लिया, वहीं बन जाएगा सत्ता का सिकंदर

असली आजादी न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली, 3 अगस्त। भारत की राजनीति में नया मोड आ चुका है। कल तक पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के सहारे सत्ता हासिल करने वाले राजनीतिक दलों को अब सत्ता के शिखर तक पहुँचने के लिए Gen-Z का ही सहारा लेना होगा। पिछले कुछ वर्षों से 2029 के लोकसभा चुनाव को भारतीय राजनीति के लिए एक नए युग की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं होगा, बल्कि Gen-Z का भरोसा जीतने का भी होगा। यह एक ऐसा चुनाव होगा जिसमें 18-32 की पीढ़ी वोट का एक बड़ा हिस्सा देगी। यानी हर चौथा वोट Gen-Z का होगा। इस बदलते चुनावी गणित को ध्यान में रखते हुए भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय पार्टियों को अपनी-अपनी रणनीतियों में बड़े बदलाव करने होंगे। वर्ष-1995 में भारत में पहला मोबाईल कॉल हुआ, इसके बाद वर्ष-2004 में इनकमिंग और आउटगोइंग फ्री होने के बाद 2016 में डाटा विघटन होने के बाद अब पारंपरिक रैलियों और भाषणों के साथ-साथ सोशल मीडिया, छोटे वीडियो, पॉडकास्ट, इन्फ्लुएंसर नेटवर्क और युवा संवाद भी चुनाव प्रचार का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। हाल ही में हुए नीट युजी प्रोटेस्ट से साफ है कि भारतीय राजनीति में एक नया खिलाड़ी उभर रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कोई बड़ा पॉलिटिकल लीडर मौजूद नहीं था, न ही कोई पार्टी का झंडा था। लेकिन हजारों युवा सड़कों पर उतर आए और इन युवाओं को सिर्फ इंस्टाग्राम पेज, कैंपस नेटवर्क और डिजिटल क्रिएटर्स ने मदद की। यह दिखाता है कि Gen-Z अब सिर्फ डिजिटल दुनिया तक ही सीमित नहीं, बल्कि पैटर्न को समझकर और डिजिटल तरीके से ऑर्गनाइज होकर वे सरकार पर सीधा दबाव डाल सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि यह पीढ़ी जाति या पारंपरिक पॉलिटिकल निष्ठा के बजाय रोजगार, शिक्षा, रिक्रूटमेंट एग्जाम में ट्रांसपेरेंसी, स्टार्टअप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल मौके और सरकारी प्रदर्शन जैसे मुद्दों से ज्यादा मोटिवेटेड होगी। यहीं वजह है कि लगभग हर बड़ी पार्टी खास तौर पर युवाओं के लिए डेडिकेटेड डिजिटल टीम, सोशल मीडिया कंटेंट और कैंपेन बना रही है। आज विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र देश भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती Gen-Z तक पहुंचना है। क्योंकि, पॉलिटिकल अवेयरनेस डेवलप होने के बाद, 18-32 एज ग्रुप के ज्यादातर युवाओं ने मुख्य रूप से केंद्र में भाजपा की सरकारों को ही देखा है। इस सेगमेंट को पिछली सरकारों के परफॉर्मेंस का सीधा अनुभव नहीं है। इसलिए उनका आकलन तुलना के बजाय मौजूदा सरकार के निष्पादन पर ज्यादा आधारित होगा।
भाजपा ने परंपरागत प्रेस रिलीज और भाषणों के बजाय इंस्टाग्राम-फर्स्ट स्ट्रैटेजी पर फोकस करना शुरू कर दिया है। पेपर लीक और नौकरियों के बारे में हाल के सवालों के जवाब में, भाजपा ने औपचारिक जवाबों के बजाय फ्रेंड्स, सिटकॉम, जिम बैंटर और मीम्स के फॉर्मेट में कंटेंट जारी किया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा को यूनिवर्सिटी कैंपस में Gen-Z with MODI जैसे इंटरैक्टिव प्रोग्राम ऑर्गनाइज करने का निर्देश दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नीट पेपर लीक के खिलाफ स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर छोटे वीडियो मैसेज शेयर कर रहे हैं। कांग्रेस युवाओं के रोजाना के गुस्से, खासकर रिक्रूटमेंट एग्जाम और पेपर लीक को लेकर बनी अनिश्चितता को Gen-Z के बीच अपनी पकड़ बनाने के लिए अपने मुख्य हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। पार्टी स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन के साथ यूथ डायलॉग और राज्यों में एंटी-पेपर लीक रैलियां ऑर्गनाइज कर रही है। यह कांग्रेस शासित राज्यों के जरिए केंद्र सरकार को एक प्रपोजल भेजने की तैयारी कर रही है ताकि असेंबली इलेक्शन लड़ने की लघुतम उम्र 25 से घटाकर 21 साल की जा सके। उत्तर प्रदेश में इसने अपने सोशल मीडिया सेल को पूरी तरह से बदल दिया है। यह टेक-सैवी रील्स बना रहा है, पुराने स्पोक्सपर्सन की जगह आईटी एक्सपर्ट्स और 25 साल से कम उम्र के युवाओं को ले रहा है। दक्षिण में अभिनेता विजय की नई पार्टी पूरी तरह से डिजिटल इन्फ्लुएंसर, गेमिंग कम्युनिटी और यूथ नेटवर्क पर बनाई जा रही है। पार्टी के जमीनी स्तर पर संगठन के बजाय यूथ वॉट्सएप ग्रुप और इंस्टाग्राम प्रोफाइल को एक्टिवेट करने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। पहले, बड़ी रैलियां, लंबे भाषण, पोस्टर, पैम्फलेट और टीवी ऐड ज्यादा आम थे। अब इंस्टाग्राम रील्स, पॉडकास्ट, मीम्स, इन्फ्लुएंसर, वॉट्सएप कम्युनिटी, लाइव डिजिटल कम्युनिकेशन जैसे तरीकों पर फोकस है।

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