केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कार्य की प्रगति की समीक्षा की
पीआईबी, अहमदाबाद, 14 जुलाई। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चल रहे निर्माण और विकास कार्यों की समीक्षा की। मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन विपिन कुमार और गुजरात सरकार तथा धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंसोर्टियम के अहम प्रतिनिधियों के साथ मंत्री ने प्रोजेक्ट के अहम पड़ावों का जायजा लिया और इसे पूरा करने के लिए रणनीतिक रोडमैप को अंतिम रूप दिया। प्रोजेक्ट के राष्ट्रीय महत्व पर ज़ोर देते हुए मंत्री ने कहा कि धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सिर्फ अहमदाबाद या गुजरात के लिए एक क्षेत्रीय संपत्ति नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए अत्यधिक रणनीतिक महत्व वाला एक अहम प्रोजेक्ट है। उन्होंने कहा कि यह भारत में अपनी तरह का पहला एयरपोर्ट प्रोजेक्ट है जिसे मैन्युफैक्चरिंग हब, भविष्य की ग्रीन सिटी और सेमीकंडक्टर क्लस्टर के साथ सहजता से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करना और इसके उद्घाटन में तेज़ी लाना है। केंद्र सरकार और गुजरात सरकार दोनों का अभूतपूर्व सहयोग और सक्रिय भागीदारी इस प्रोजेक्ट को भारत के एविएशन सेक्टर में सचमुच एक अनोखा और खास प्रोजेक्ट बना रही है। साइट पर भौतिक प्रगति की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि शुरुआती चुनौतियों के बावजूद व्यवस्थित योजना और मज़बूत क्रियान्वयन के ज़रिए रास्ते की बाधाओं को सफलतापूर्वक दूर कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि कुल निर्माण कार्य का लगभग 80% हिस्सा पूरा हो चुका है। गौरतलब है कि अत्याधुनिक टर्मिनल बिल्डिंग का 75% काम पूरा हो चुका है, जबकि सहायक संरचनाओं, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर, मुख्य रनवे और टैक्सीवे का 100% काम पूरा हो चुका है। धोलेरा में उभर रहे विशाल औद्योगिक इकोसिस्टम की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, मंत्री ने बताया कि 2,500 वर्ग मीटर का एक समर्पित कार्गो टर्मिनल बनाया जा रहा है। इसके अलावा, यात्रियों की आवाजाही को सुचारू बनाने के लिए 25,000 वर्ग मीटर में फैला एक पैसेंजर टर्मिनल बनाया जा रहा है, जिसकी क्षमता सालाना 20 लाख यात्रियों को संभालने की होगी। केंद्रीय मंत्री ने धोलेरा के पीछे की दूरदर्शी योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस योजना का शुरुआती विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का था, जिन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए एक भविष्यवादी शहर, मैन्युफैक्चरिंग हब और विश्व-स्तरीय हवाई अड्डे की कल्पना की थी। इस विज़न को साकार करने के लिए, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, गुजरात सरकार और ठकउऊकळ (ऊढककळ के तहत) के बीच एक जॉइंट वेंचर बनाया गया। किंजरापु राममोहन नायडू ने आगे कहा कि धोलेरा को मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के एक मॉडल के तौर पर डिज़ाइन किया जा रहा है। विश्व-स्तरीय हवाई कनेक्टिविटी के साथ-साथ, यह हवाई अड्डा एक प्रीमियम छह-लेन वाले नेशनल हाईवे और हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से भी जुड़ा है। असल में, केंद्रीय कैबिनेट ने हाल ही में रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट के लिए 20,667 करोड़ रूपये की मंज़ूरी दी है और हमने यह सुनिश्चित किया है कि इसका एंट्री पॉइंट और स्टेशन सीधे हवाई अड्डे के टर्मिनल के बगल में हों। अहमदाबाद से यात्रा करने वाला यात्री हाई-स्पीड ट्रेन से सीधे टर्मिनल पर उतर सकेगा। व्यापक रणनीतिक विज़न पर बात करते हुए मंत्री ने समझाया कि हवाई अड्डों को सामान्य नागरिक उड्डयन कार्यों से आगे बढ़कर आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनना चाहिए। सोच में यह बदलाव धोलेरा को एरोट्रोपोलिस के रूप में डिज़ाइन करने में दिखता है। उन्होंने कहा कि जब भी ग्लोबल या लोकल कंपनियां भविष्य की टेक्नोलॉजी में निवेश करना चाहती हैं – चाहे वह सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हो या ग्रीन एनर्जी – तो उनकी मुख्य माँग एयरपोर्ट के पास होने की होती है। धोलेरा यह खास फायदा देता है। खासकर, टाटा की आने वाली सेमीकंडक्टर फ़ैसिलिटी और एयरबस की डिफेंस पार्टनरशिप को साइट पर मौजूद हमारे खास मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल हैंगर से सीधा फ़ायदा होगा। ये हैंगर भारत के पहले स्वदेशी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, उ-295 के टफड ऑपरेशन में मदद करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि सिविल एविएशन सेक्टर में एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर, हमने ब्राज़ील की बड़ी एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर और अडानी एविएशन सिस्टम्स के बीच एमओयू को फाइनल कर लिया है। भारत के पहले सिविलियन मेक इन इंडिया एयरक्राफ्ट की फाइनल असेंबली लाइन के लिए धोलेरा को चुना गया है, जिसका लक्ष्य 2028 तक पहला प्लेन तैयार करना है। इससे धोलेरा सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस में भविष्य के निवेश के लिए सबसे अच्छी जगह बन जाता है। मंत्री ने कॉन्ट्रैक्टर और अधिकारियों को सितंबर तक साइट पर काम पूरा करने का लक्ष्य देते हुए प्रेस ब्रीफ़गिं खत्म की। साथ ही, मंत्रालय अगले तीन महीनों में डीजीसीए के साथ मिलकर जरूरी एयरपोर्ट लाइसेंसिंग हासिल करने के लिए काम करेगा, ताकि सितंबर या अक्टूबर तक धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को चालू किया जा सके। एयर इंडिया की फ़्लाइट से जुड़े अहमदाबाद प्लेन क्रैश के बारे में मंत्री ने कहा कि जांच अभी अपने आखिरी चरण में है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो जो जांच कर रहा है, पूरी तरह से काबिल है और पूरी पारदर्शिता के साथ जांच कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह रिपोर्ट जल्द से जल्द आना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी यह है कि दुर्घटना कैसे और क्यों हुई, इसका पूरा सच सामने आए। मंत्री ने यह भरोसा जताते हुए अपनी बात खत्म की कि जांच की फाइनल रिपोर्ट बहुत जल्द आ जाएगी।

