(ध्रुविक भट्ट) असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण 23 दिसंबर। जर्मनी की अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संस्थान डीडब्ल्यू (ऊह) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत के विभिन्न राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में 65000 सरकारी स्कूलों मंे पिछले 10 सालों मंे बच्चों के दाखिला लगातार कम हो रहे हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में 5000 स्कूल ऐसे हैं जहां शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया है। जर्मनी की मीडिया संस्थान डीडब्ल्यू (ऊह) ने देश के शिक्षा मंत्रालय द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत किये गये आधिकारिक डेटा के आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित की है। देशभर के राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों की सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था के निराश करने वाले आंकडों के बीच केन्द्रशासित प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव की सरकारी शिक्षा व्यवस्था ने पूरे देश में गौरव दिलाने वाला काम करके दिखाया है। पीएम मोदी के सीधे मार्गदर्शन में प्रशासक प्रफुल पटेल के कुशल नेतृत्व में केन्द्रशासित प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव में शिक्षा के क्षेत्र में जो काम हुआ है और खासकर सरकारी स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर एवं शिक्षा पद्धति में आधुनिक बदलाव किया गया है इसके कारण इस प्रदेश में सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने वाले बच्चों की होड सी लगी हुई है। आज केन्द्रशासित प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव के सभी सरकारी स्कूलों में 92000 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वर्ष 2016 के मुकाबले सरकारी स्कूलों में प्रवेश प्राप्त करने वाले बच्चों की तादाद कई गुना बढ चुकी है। इस प्रदेश के तीनों जिलों में पिछले 9 सालों में नंदघर एवं आधुनिक स्कूलों का निर्माण, स्मार्ट क्लासों का निर्माण, विषय आधारित विशेषज्ञ शिक्षकों की भर्ती, शिक्षकों की ट्रेनिंग, अभिभावकों की भागीदारी, उच्च गुणवत्तावाला मध्याहन भोजन, शाला प्रवेश उत्सव सहित अनेक ऐसे कदम उठाये गये हैं जिसके कारण प्राइवेट स्कूलों को छोडकर बच्चे सरकारी स्कूलों का रुख कर रहे हैं। गौरतलब है कि 2016 तक केन्द्रशासित प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव में बालवाडियों और सरकारी स्कूलों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। 2016 में प्रदेश की कमान संभालने के बाद प्रशासक प्रफुल पटेल ने शिक्षा को सबसे पहली प्राथमिक सूची में शामिल किया था। आज देशभर के सरकारी स्कूलों के निराश करने वाले आंकडों के बीच केन्द्रशासित प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव की गौरव प्राप्त करने वाली स्थिति दूसरे राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के लिए मिशाल कायम करने वाली है। कहते हैं कि बदलाव एक दिन में नहीं होता है उसके लिए लगातार ग्राउंड जीरो पर पसीना बहाना पडता है, कुछ कठोर निर्णय भी लेने पडते हैं।

