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भारत की एक विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन की भूमिका महत्वपूर्ण है: प्रशासक प्रफुल पटेल

असली आजादी न्यूज नेटवर्क, सिलवासा 27 फरवरी। नमो चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान सिलवासा द्वारा 53वां वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (कअढरटउडठ 2026) का 27 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में प्री-कॉन्फ्रेंस 26 फरवरी 2026 को आयोजित हुआ, जबकि मुख्य सम्मेलन 27 फरवरी को शुरू हुआ और 1 मार्च 2026 तक चलेगा। संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव तथा लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल ने 27 फरवरी 2026 को 53वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन का उद्घाटन किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रागट्य करके की गई। इसके बाद कॉन्फ्रेंस में आए महानुभावों का प्रशासक प्रफुल पटेल ने मोमेंटो और सर्टिफिकेट देकर स्वागत किया। प्रशासक प्रफुल पटेल ने सभी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए अपने अभिभाषण में इस संमेलन के महत्व एवं प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस प्रदेश द्वारा किए गए विकास का लेखा जोखा प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने भारत में ठङ्मल्ल उङ्मेे४ल्ल्रूुं’ी ऊ्र२ीं२ी२ (डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हृदयरोग, कैंसर) की बढ़ती समस्या की चिंता व्यक्त करते हुए जीवनशैली नियमन, निवारक जांच और सामुदायिक भागीदारी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया की भारत की एक विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में ढ१ी५ील्ल३्र५ी ंल्लि रङ्मू्रं’ टी्रिू्रल्ली की भूमिका अहम है। प्रशासक प्रफुल पटेल ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। भारत में ढ१ी५ील्ल३्र५ी टी्रिू्रल्ली की अवधारणा प्राचीन काल से विकसित रही है। ढ१ी५ील्ल३्रङ्मल्ल ्र२ इी३३ी१ ३ँंल्ल उ४१ी सिंधु घाटी सभ्यता की उन्नत स्वच्छता और नगर नियोजन प्रणालियाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य के महत्व को दर्शाती हैं। उपनिषदों का सर्वे सन्तु निरामया: सार्वभौमिक स्वास्थ्य की भावना प्रकट करता है, जबकि अथर्ववेद में रोग, औषधि और स्वच्छता के उल्लेख मिलते हैं। भारत में निवारक स्वास्थ्य एक समृद्ध सभ्यतागत परंपरा का हिस्सा रहा है। यह सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @ 2047 के विजन से प्रेरित है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व एवं स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण पहल है। साथ ही प्रशासक प्रफुल पटेल के मार्गदर्शन एवं अथक प्रयासों से संघ प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं चिकित्सा अवसंरचना के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन संभव हो पाया है। इस सम्मेलन की थीम एक स्वस्थ भारत के लिए नीति को व्यवहार में बदलना -@ 2047 तक विकसित भारत का रास्ता है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भारत में समग्र स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु नीतिगत परिवर्तनों के लिए एक प्रभावी घोषणा-पत्र तैयार करना है। यह मंच नीति-निर्माताओं, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, स्वास्थ्य सेवा नेतृत्वकर्ताओं, शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं को एक साथ लाकर ज्ञान-विनिमय, सहयोग, नवाचार एवं ठोस नीतिगत सुधारों को बढ़ावा देगा। इस सम्मेलन में 1500 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहें हैं जिनमें 15 विदेशी प्रतिनिधि भी शामिल है। अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि मंडलों में यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी (एपिडेमियोलॉजी एवं वन हेल्थ), ग्लोबल हेल्थ एकेडमी (यूएसए), यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन (यूके) सहित विश्व बैंक (दक्षिण-पूर्व एशिया प्रमुख), बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन, खऌढकएॠड एवं अन्य वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। राष्ट्रीय स्तर पर महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (ऊॠऌर), राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (ठउऊउ), ठडळळड, ठऌरफउ तथा अन्य प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों एवं गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेने पहुंचे है। सम्मेलन में 380 मौखिक शोध प्रस्तुतियां एवं 200 ई-पोस्टर प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही है। साथ ही विभिन्न स्मारक व्याख्यान, पैनल चर्चाएं एवं नीतिगत विमर्श सत्र भी शामिल है। सम्मेलन का प्रसारण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी किया जा रहा है। यह सम्मेलन संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव के लिए अत्यंत गर्व का एवं ऐतिहासिक क्षण सिद्ध होगा। पहली बार इतने बड़े राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सार्वजनिक स्वास्थ्य सम्मेलन का आयोजन इस प्रदेश में हो रहा है, जो इसे राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर सशक्त पहचान प्रदान करेगा। यह सम्मेलन निवारक, उपचारात्मक एवं सामाजिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नीति से व्यवहार (ढङ्म’्रू८ ३ङ्म ढ१ंू३्रूी) तक प्रभावी सेतु स्थापित करते हुए विकसित भारत @ 2047 की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। कअढरटउडठ 2026 में होने वाली चर्चाएं उस भविष्य को आकार दे सकती हैं, जो ढङ्म’्रू८ ्रल्ल३ङ्म ढ१ंू३्रूी में और श्र२्रङ्मल्ल ्रल्ल३ङ्म टीं२४१ुं’ी फी२४’३२ में बदलेंगी।

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zoritoler imol May 7, 2026 at 8:53 pm

I enjoy your work, thanks for all the useful content.

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