उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने अगत्ती, लक्षद्वीप में मत्स्य पालन आउटरीच कार्यक्रम में भाग लिया
– उपराष्ट्रपति ने लक्षद्वीप में सजावटी मत्स्य पालन के विकास के लिए रणनीतिक कार्य योजना ”मिशन रंगीन मछली 2031” जारी की – नीली क्रांति भी हरित और श्वेत क्रांति की तरह ही बदलाव लाने वाली होगी: उपराष्ट्रपति – लक्षद्वीप पहुंचने पर उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन का प्रशासक प्रफुल पटेल ने गर्मजोशी से किया स्वागत – मत्स्य पालन आउटरिच कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, लक्षद्वीप के प्रशासक श्री प्रफुल के. पटेल, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी की रही उपस्थिति
पीआईबी, नई दिल्ली 31 अगस्त। उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज लक्षद्वीप के अगत्ती में आयोजित मत्स्य पालन आउटरिच कार्यक्रम में भाग लिया और सजावटी मत्स्य पालन विकास के लिए रणनीतिक कार्य योजना मिशन रंगीन मछली 2031 जारी की। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र के लाभार्थियों को सरकारी लाभ और सहायता भी वितरित की। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को लक्षद्वीप के लिए ऐतिहासिक दिन और भारत की नीली क्रांति की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रीय ध्वज में नीला चक्र नीली क्रांति और समुद्री अर्थव्यवस्था की क्षमता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मत्स्य पालन और जलीय कृषि अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में उभरे हैं। श्री राधाकृष्णन ने कहा कि सरकार सीधे मछुआरों तक सहायता और योजनाएं पहुंचाकर शासन प्रणाली में बदलाव ला रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत लक्षद्वीप के लिए 62 करोड़ रुपये से अधिक की मत्स्य विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि लक्षद्वीप में लगभग एक लाख टन से अधिक की मत्स्य क्षमता है, जिसमें 94,000 टन टूना और ऐसी अन्य प्रजातियां शामिल हैं। उन्होंने द्वीपीय समुदायों की समृद्धि सुनिश्चित करते हुए, इस क्षमता का वैज्ञानिक और सतत तरीके से उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का समुद्री खाद्य निर्यात पिछले वित्तीय वर्ष में 120 से अधिक देशों तक पहुंच के साथ 73,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि ईईजेड और खुले समुद्र से संबंधित पहल मत्स्य पालन क्षेत्र और वैश्विक समुद्री खाद्य बाजारों में भारत की उपस्थिति को और मजबूत करेंगी। श्री सीपी राधाकृष्णन ने सतत विकास पर जोर देते हुए, जिम्मेदार मत्स्य पालन, समुद्री संसाधनों के संरक्षण और अवैध, अनधिकृत और अनियमित मत्स्य पालन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से मत्स्य पालन को केवल एक पैतृक व्यवसाय के रूप में नहीं, बल्कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और वैश्विक अवसरों से प्रेरित एक आधुनिक व्यवसाय के रूप में देखने का आग्रह किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि हरित क्रांति और श्वेत क्रांति की तरह ही, नीली क्रांति में भी मत्स्य पालन से जुड़े समुदायों के जीवन में बदलाव लाने की क्षमता है। उन्होंने सभी हितधारकों से भारत की नीली अर्थव्यवस्था को विकसित भारत 2047 का एक सशक्त स्तंभ बनाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, लक्षद्वीप के प्रशासक श्री प्रफुल के. पटेल, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

