असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण 27 जनवरी। दमण में 26 जनवरी को देश का 77वां गणतंत्र दिवस और संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव का 7वां एकीकरण दिवस का पर्व हर्षोल्लास के साथ स्वामी विवेकानंद खेल मैदान में मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव के प्रशासक प्रफुल पटेल ने ध्वजारोहण किया। समारोह में जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण, कर्मचारी, स्थानीय नागरिक और विद्यार्थी बडी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रशासक प्रफुल पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के लिए आज दुगने हर्ष की बात है। उन्होंने बताया कि एक ओर आज समग्र देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, वहीं संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण एवं दीव 7 वां एकीकरण दिवस भी मना रहा है और मैं समस्त प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने कहा कि दोनों संघ प्रदेशों के एकीकरण से दोनों ही संघ प्रदेशों में दूरियां भी कम हुई है तथा प्रशासनिक खर्च में भी कमी आई है। परंतु विशेष साधारण जनता और प्रशासन के बीच के अंतर में भी कमी आई है। उन्होंने बताया कि आज साधारण व्यक्ति सिलवासा के दुधनी कौंचा से भी अपने प्रश्नों को खूब सरलता से प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष पेश कर सकता है। भारत की ऐतिहासिक यात्रा और स्वतंत्रता संग्राम का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि सदियों तक आक्रमणों और लूट के बावजूद भारत ने कभी हार नहीं मानी। हमारे क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से देश को आज़ादी मिली और लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हुई। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के ऐतिहासिक योगदान का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि 550 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर एक अखंड भारत का निर्माण करना राष्ट्रनिर्माण का अद्वितीय कार्य था। प्रशासक प्रफुल पटेल ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है। पंचायती राज से लेकर संसद तक शासन व्यवस्था जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से चलती है और चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी है। उन्होंने मतदाता सूची के शुद्धिकरण और नागरिकों की जागरूकता पर जोर देते हुए विशेष रूप से युवाओं से मतदान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। भारत की सांस्कृतिक विरासत पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं, धर्मों और परंपराओं का अद्भुत संगम है और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को जीता है। भारत ने सदैव सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान किया है। इतिहास साक्षी है कि यह देश कभी अत्यंत समृद्ध था। सोने की चिड़िया कहा जाने वाला यह भारत बार-बार लूटा गया, लेकिन फिर भी देश की आत्मा कभी टूटी नहीं। मुगलों और अंग्रेजों के लंबे शासन के बाद भी यह देश अपनी सांस्कृतिक और नैतिक शक्ति के बल पर फिर खड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि इस देश का वैभव इतना भव्य है कि जब विश्व के लोगों को संस्कृति, सभ्यता, परंपराओं, उत्तम जीवन पद्धति, संस्कार की (समाचार का शेष पेज 7 पर)

