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न्यायिक अधिकारी सरकारी कर्मचारी नहीं, उनकी अलग श्रेणी: सुप्रीम कोर्ट

– जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की टिप्पणी

नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति भले ही संवैधानिक व्यवस्था के तहत राज्य सरकारें करती हों, लेकिन उन्हें सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारी एक विशिष्ट और अलग श्रेणी (सेपरेट क्लास) के अधिकारी हैं, इसलिए उनकी सेवा शर्तों और सेवानिवृत्ति आयु को सामान्य सरकारी कर्मचारियों के समान नहीं माना जा सकता।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे, जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने के प्रस्ताव पर विभिन्न राज्य सरकारों की आपत्तियों पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान अदालत ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता एवं न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) सिद्धार्थ भटनाकर ने अदालत को बताया कि कुछ राज्य सरकारों का तर्क है कि यदि न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाई जाती है, जबकि राज्य के अन्य सरकारी कर्मचारी पहले सेवानिवृत्त होते हैं, तो इससे समानता का प्रश्न उठ सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह तुलना उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारियां सामान्य सरकारी कर्मचारियों से अलग होती हैं। इसलिए उनकी सेवानिवृत्ति आयु अलग निर्धारित की जा सकती है। पीठ ने यह भी कहा कि देश में पहले से ही कई पेशेवर वर्गों, जैसे प्रोफेसरों और चिकित्सकों, के लिए अलग-अलग सेवानिवृत्ति आयु निर्धारित है और अनुभव इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकारों की उस दलील को भी स्वीकार नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। अदालत ने कहा कि किसी न्यायिक अधिकारी के सेवानिवृत्त होने पर सरकार को एक ओर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ देने पड़ते हैं, वहीं रिक्त पद पर नए अधिकारी की नियुक्ति कर उसका वेतन भी देना होता है। ऐसे में अनुभवी न्यायिक अधिकारी को कुछ और वर्षों तक सेवा में बनाए रखना वित्तीय दृष्टि से भी अधिक व्यावहारिक हो सकता है। गौरतलब है कि 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी उच्च न्यायालयों से न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के मुद्दे पर समयबद्ध निर्णय लेने को कहा था। अंतरिम व्यवस्था के तहत अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि जिन राज्यों में संबंधित उच्च न्यायालय और राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर सहमत हैं, वहां न्यायिक अधिकारियों को बढ़ी हुई आयु सीमा के अनुसार सेवा जारी रखने की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का कोई भी निर्णय 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद सेवानिवृत्त होने वाले न्यायिक अधिकारियों पर लागू होगा।

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