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सांसद उमेश पटेल ने लोकसभा में बाढ पीडितों के स्थाई समाधान और महिला पंचायत प्रतिनिधियों को 5 वर्ष का पूर्ण कार्यकाल देने की उठाई मांग

असली आजादी न्यूज नेटवर्क , नई दिल्ली 04 अगस्त। दमण-दीव के सांसद उमेश पटेल ने आज लोकसभा में अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़े दो अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से उठाते हुए केंद्र सरकार का ध्यान प्रदेश की ज्वलंत समस्याओं की ओर आकर्षित किया। इनमें नियम 377 के अंतर्गत हाल ही में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के लिए स्थाई समाधान एवं पुनर्वास की मांग तथा अतारांकित प्रश्न संख्या 2534 के माध्यम से दमण एवं दीव की महिला पंचायत प्रतिनिधियों को पाँच वर्ष का पूर्ण कार्यकाल सुनिश्चित करने के मुद्दे शामिल रहे। सांसद उमेश पटेल ने नियम 377 के अंतर्गत सदन में कहा कि हाल ही में रिकॉर्ड वर्षा, मधुबन बांध से छोड़े गए जल, समुद्र में उच्च ज्वार तथा दमणगंगा सहित अन्य नदियों में अत्यधिक जलप्रवाह के कारण दादरा नगर हवेली और दमण एवं दीव, सूरत, नवसारी, वलसाड तथा वापी क्षेत्र में अभूतपूर्व बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई, जिससे हजारों परिवारों का जनजीवन प्रभावित हुआ तथा किसानों, व्यापारियों और विशेष रूप से मछुआरा समाज को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा उन्होंने सदन को बताया कि अनेक नौकाएँ नष्ट हो गईं, कई बह गईं तथा बड़ी संख्या में क्षतिग्रस्त हुईं। नानी दमण के समुद्र नारायण मंदिर क्षेत्र से सुरक्षित नौका पार्किंग हटाए जाने के बाद आज तक वैकल्पिक सुरक्षित डॉकयार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे मछुआरों की समस्याएँ और बढ़ गई हैं। मिटनावाड़ सहित कई क्षेत्र प्रतिवर्ष बाढ़ की मार झेलते हैं, जिसके लिए अब स्थाई समाधान आवश्यक है। सांसद उमेश पटेल ने केंद्र सरकार से मांग की कि सभी प्रभावित परिवारों, किसानों, व्यापारियों एवं मछुआरों को वास्तविक नुकसान के अनुरूप पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। दमण एवं दीव के मछुआरों को गुजरात के समान रियायती डीजल उपलब्ध कराया जाए, आधुनिक एवं सुरक्षित डॉकयार्ड विकसित किए जाएँ, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए स्थाई पुनर्वास योजना बनाई जाए तथा दमण एवं दीव में स्थाई एनडीआरएफ इकाई स्थापित की जाए। साथ ही मधुबन बांध के लिए रीयल-टाइम अर्ली वार्निंग सिस्टम, सायरन एवं एसएमएस अलर्ट प्रणाली तत्काल लागू करने की मांग की, ताकि भविष्य में जान-माल की क्षति को रोका जा सके। इसी दिन सांसद उमेश पटेल ने अतारांकित प्रश्न संख्या 2534 के माध्यम से दमण एवं दीव की महिला जिला पंचायत अध्यक्षों के कार्यकाल का विषय उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब पंचायती राज संस्थाओं का संवैधानिक कार्यकाल पाँच वर्ष है, तब दमण एवं दीव में महिला जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल लगभग ढाई वर्ष तक सीमित क्यों रखा गया है। उन्होंने कहा कि इतने कम कार्यकाल में महिला प्रतिनिधियों को अपने नेतृत्व, प्रशासनिक क्षमता एवं विकास कार्यों को प्रभावी रूप से लागू करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता, जिससे महिला सशक्तिकरण की भावना प्रभावित होती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस व्यवस्था की समीक्षा कर दमण एवं दीव की महिला पंचायत प्रतिनिधियों को भी देश के अन्य राज्यों की तरह पूर्ण पाँच वर्ष का कार्यकाल सुनिश्चित किया जाए। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि संसद में उनकी प्राथमिकता हमेशा प्रदेश के नागरिकों की वास्तविक समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाना और उनके स्थाई समाधान के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित करना रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार इन दोनों महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक एवं शीघ्र निर्णय लेकर प्रदेश की जनता को न्याय प्रदान करेगी।

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