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संसदीय ओबीसी कल्याण समिति की बैठकों में सांसद उमेश पटेल ने ओबीसी के खाली पडे पदों पर उठाये सवाल: आरक्षण युवाओं को सिर्फ कागज पर नहीं वास्तविक रूप से मिले

असली आजादी न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली, 19 अक्टूबर। दमण-दीव के ओबीसी सांसद उमेश पटेल ने संसदीय ओबीसी कल्याण समिति की बैठकों में ओबीसी युवाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए जोरशोर से मांग उठाई। सांसद उमेश पटेल ने आज संसद की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कल्याण संबंधी समिति की दो महत्वपूर्ण बैठकों में ओबीसी युवाओं के रोजगार, शिक्षा, आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दे प्रमुखता से उठाए। पहली बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा राष्ट्रीय बीज निगम (एनएससी) में ओबीसी प्रतिनिधित्व की समीक्षा के दौरान मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत 402 रिक्त पदों और सात बैकलॉग पदों पर सांसद उमेश पटेल ने सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब आरक्षण की व्यवस्था, रोस्टर और जिम्मेदार अधिकारी मौजूद हैं तो 402 पद आज भी खाली क्यों हैं? इन पदों पर नियुक्तियाँ कब होंगी और देरी के लिए जिम्मेदार कौन है? विशेष रूप से प्लांट प्रोटेक्शन डायरेक्ट्रेट में 219 रिक्त पदों तथा राष्ट्रीय बीज निगम में आठ ओबीसी रिक्त पदों को लेकर जवाब माँगा। दूसरी बैठक में सांसद उमेश पटेल ने कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) तथा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) में ओबीसी वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व, वैज्ञानिक भर्ती में देरी, 27% आरक्षण के अनुपालन, छात्रवृत्ति तथा उच्च शिक्षा के अवसरों का मुद्दा उठाया। सांसद उमेश पटेल ने इन बैठकों में कई प्रमुख मांगे रखी। जिनमें 30 दिनों में ओबीसी रिक्तियों और बैकलॉग पदों की प्रमाणित रिपोर्ट दी जाए, 90 दिनों में लंबित पदों को भरने का भर्ती कैलेंडर प्रस्तुत किया जाए, सभी संबंधित संस्थानों के आरक्षण रोस्टर का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए, दमण, दीव और दादरा नगर हवेली के ओबीसी युवाओं के लिए कृषि, शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रशिक्षण और रोजगार मार्गदर्शन के विशेष कार्यक्रम शुरू किए जाएं, छह महीने में दोनों विभाग वास्तविक नियुक्तियों और सुधारात्मक कार्रवाई की अलग-अलग एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करें जैसे मुद्दे शामिल रहे। उन्होंने कहा कि ओबीसी युवाओं को आश्वासन नहीं, अधिकार और अवसर चाहिए। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य सरकारी फाइलों में केवल प्रतिशत दिखाना नहीं, बल्कि पिछड़े वर्ग के पात्र युवाओं को रोजगार, शिक्षा और सम्मानजनक प्रगति के अवसर देना है। जब पद खाली हैं और युवा बेरोजगार हैं, तो सरकार को बताना होगा कि नियुक्तियां कब होंगी। अब केवल आश्वासन नहीं, जवाबदेही और परिणाम चाहिए। उन्होंने समिति से दोनों विभागों की समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा इन मुद्दों को समिति की कार्यवाही में दर्ज करने का आग्रह किया।

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