– मोदी सरकार का लोकसभा में खुलासा, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दिया जवाब
– केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासन पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि यूनियन टेरेटरी के लिए अलग मंत्रालय या नई नीति बनाने की कोई योजना नहीं है – संविधान के तहत मौजूदा व्यवस्था में ही योजनाएं चलाई जा रही है, मंत्रालयों के बीच समन्वय और संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति की निगरानी से विकास कार्य प्रभावी ढंग से आगे बढ रहे हैं: राज्य मंत्री नित्यानंद राय – दमण-दीव सांसद उमेश पटेल के सवाल के जवाब में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केन्द्रशासित प्रदेशों को लेकर चल रही अटकलों पर लगा दिया है पूर्ण विराम
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली 24 मार्च। पिछले कुछ समय से देश के केन्द्रशासित प्रदेशों को लेकर अलग यूटी मंत्रालय की चल रही अटकलों पर आज मोदी सरकार ने पूर्ण विराम लगा दिया है। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन पर सरकार ने साफ किया है कि अलग मंत्रालय या नई नीति बनाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि संविधान के तहत मौजूदा व्यवस्था में ही सभी योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मंत्रालयों के बीच समन्वय और संसदीय समिति की निगरानी से विकास कार्य प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रहे हैं। नित्यानंद राय ने आगे बताया कि देश के केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन संविधान के अनुच्छेद 239 से 241 के तहत किया जाता है। उन्होंने कहा कि अभी सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, जिसमें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग मंत्रालय, विशेष समिति या नई नीति बनाई जाए। उन्होंने बताया कि फिलहाल विभिन्न मंत्रालयों के बीच नियमित बातचीत और समन्वय से ही योजनाएं बनाई और लागू की जाती हैं। साथ ही, संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति केंद्र शासित प्रदेशों के कामकाज की निगरानी और समीक्षा करती है। लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने निर्दलीय सांसद पटेल उमेश पटेल के सवाल के जवाब में ये जानकारी दी। लिखित उत्तर में राय ने कहा कि सरकार को केंद्र शासित प्रदेशों के प्रबंधन के लिए केंद्र शासित प्रदेश मामलों का अलग मंत्रालय या विभाग बनाने की आवश्यकता महसूस नहीं होती है। इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन की निगरानी के लिए संसदीय निरीक्षण समिति गठित करने की भी कोई योजना नहीं है। उन्होंने दादरा और नगर हवेली और दमण और दीव जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष नीति ढांचा बनाने की संभावना से भी इनकार किया, भले ही उनकी भौगोलिक और प्रशासनिक आवश्यकताएं अलग हों।

