असली आजादी न्यूज नेटवर्क, सिलवासा 07 नवंबर। घेरैया नृत्य केवल एक लोक नृत्य नहीं है। यह आस्था, पवित्रता और परंपरा का प्रतीक है, जो सुख और समृद्धि के लिए आशीर्वाद का प्रतिनिधित्व करता है। दीवाली के मौके पर घेरैया नृत्य करने वाले एक पारंपरिक समूह ने अपनी शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया। दमण की समृद्ध लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं को प्रदर्शित करते हुए, यह समूह संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमण-दीव भाजपा अध्यक्ष महेश आगरिया के आवास पर पहुंचा। महेश अगरिया और उनके परिवार ने पारंपरिक उत्साह के साथ घेरैया समूह का स्वागत किया। इसके बाद कलाकारों ने घर के आंगन और घर के भीतर एक मनमोहक घेरैया नृत्य प्रस्तुत किया और परिवार के लिए सुख, शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। दक्षिण गुजरात की सीमा के पास दमण स्थित मरवड, कडैया, भीमपोर और वरकुंड जैसे ग्रामीण इलाकों में दीवाली के त्यौहार के दौरान घेरैया या घेर नृत्य की परंपरा को बहुत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह नृत्य दमण की जनजातीय लोक संस्कृति का एक अनूठा प्रतीक है, जो सामुदायिक एकता और पीढि़यों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। घेरैया नृत्य अपनी पारंपरिक वेशभूषा और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। रंग-बिरंगे पारंपरिक कपड़े और सफेद गांधी टोपी पहने, तथा गले में फूलों की माला डाले हुए समूह के सदस्य, ढोल की थाप पर एक साथ नृत्य करते हैं। समूह के मुखिया के हाथ में मौजूद नौ रंगों वाला एक रंगीन छाता इस परंपरा की एक खास पहचान है, जबकि अन्य कलाकारों के पास मौजूद मोर के पंखों के गुच्छे पवित्रता और धार्मिक आस्था से जुड़े हैं। स्थानीय लोक मान्यताओं के अनुसार घर के आंगन में और परिवार के सदस्यों के आसपास मोर के पंखों को लहराकर आशीर्वाद मांगा जाता है। इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य घर से नकारात्मकता को दूर करना, शांति और समृद्धि सुनिश्चित करना तथा परिवार में खुशहाली लाना है। ग्रामीण इलाकों में घेरैयाओं का आना शुभ माना जाता है, दिवाली के त्यौहार के दौरान उनके नृत्य और आशीर्वाद का बहुत उत्साह के साथ स्वागत किया जाता है। दिवाली के पूरे मौसम में घेरैया समूह गाँव के घरों में जाता है और लोक गीतों तथा ढोल की थाप पर नृत्य प्रस्तुत करता है। बदले में ग्रामीण उन्हें भोजन, मिठाइयाँ या दक्षिणा (धनराशि) देकर सम्मानित करते हैं। यह परंपरा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समुदाय के भीतर आपसी प्रेम, सम्मान, सामाजिक एकता और शुभता की भावना को मजबूत करती है। दमण की ऐतिहासिक और विविध सांस्कृतिक परंपराओं के बीच, घेरैया नृत्य ने अपनी एक अलग पहचान बनाए रखी है। आज के आधुनिक युग में भी यह हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है कि हम इस लोक विरासत को नई पीढि़यों तक पहुँचाएँ और ऐसी परंपराओं को सहेज कर रखें। दिवाली के शुभ अवसर पर महेश आगरिया के घर पर घेरैया समूह के आगमन ने वहां के माहौल को लोक संगीत, परंपरा, आस्था और उत्साह से भर दिया। इस आयोजन ने दमण की समृद्ध लोक संस्कृति का सम्मान करने और उसकी परंपराओं को संरक्षित करने के महत्व का एक सुंदर संदेश भी दिया।

