asliazadi
दमण, दानह, दीव की खबरें

प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदम:कराया गांव में किसानों को मिला टिकाऊ कृषि का मंत्र आत्मा परियोजना के प्रशिक्षण शिविर में प्राकृतिक खेती के लाभों और किसान सारथी ऐप की उपयोगिता से कराया गया अवगत

असली आजादी न्यूज नेटवर्क, वलसाड, 4 अगस्त। वलसाड जिले के नानापोंढा तहसील के कराया गांव में आत्मा (ATMA) परियोजना के तहत प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रसायनमुक्त खेती के प्रति जागरूक करना, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश देना तथा कम लागत में अधिक आय देने वाली खेती की तकनीकों से परिचित कराना था। प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक कृषि के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में गुजरात प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड (GPKVB) के मास्टर ट्रेनर एवं रिसोर्स पर्सन धर्मेश पटेल, ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर (BTM) अंकुर प्रजापति तथा असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर (ATM) जयश्री टंडेल ने किसानों को प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक और व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास का प्रभावी माध्यम है। इससे जल, भूमि और पर्यावरण की गुणवत्ता सुरक्षित रहती है तथा मिट्टी की उर्वरता में निरंतर वृद्धि होती है। रासायनिक उर्वरकों और जहरीले कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से जहां खेतों में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीवों का नाश होता है, वहीं प्राकृतिक खेती में जीवामृत, घन जीवामृत और मल्चिंग (आच्छादन) जैसी तकनीकों से केंचुओं सहित लाभकारी जीवों की संख्या बढ़ती है, जो मिट्टी को अधिक उपजाऊ बनाते हैं। प्रशिक्षकों ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है। वहीं प्राकृतिक उत्पादों की बाजार में बेहतर कीमत मिलने से किसानों की आय में वृद्धि होती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और गरीबी व बेरोजगारी जैसी समस्याओं के समाधान में भी सहायता मिलती है। उन्होंने बताया कि एक देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से लगभग 30 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती की जा सकती है। गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड़ और मिट्टी के मिश्रण से तैयार होने वाले जीवामृत और घन जीवामृत अत्यंत कम लागत वाले तथा प्रभावी जैविक पोषक तत्व हैं, जो फसलों की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक खेती से देशी गायों के संरक्षण और संवर्धन को भी बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही वातावरण में मौजूद नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थापित करने की प्राकृतिक प्रक्रिया मजबूत होती है, जिससे भूमि की उत्पादक क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण और सुरक्षित कृषि व्यवस्था सुनिश्चित करने का आह्वान किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से किसान सारथी ऐप डाउनलोड कराया गया। विशेषज्ञों ने ऐप की विभिन्न सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया कि इसके माध्यम से किसान आधुनिक कृषि तकनीक, सरकारी योजनाओं, मौसम संबंधी जानकारी तथा खेती से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों के प्रति उत्साह व्यक्त किया और इसे अपनाकर कम लागत, बेहतर उत्पादन तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करने का संकल्प लिया। प्रशिक्षण शिविर ने किसानों को टिकाऊ और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Related posts

घेलवाड ग्राम पंचायत में सबकी योजना सबका विकास को लेकर हुई ग्रामसभा

Asli Azadi

दमण के मीरासोल रिसोर्ट में आयोजित हुई 24वीं यूटीएलबीसी की बैठक

Asli Azadi

पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी में भाजपा की ऐतिहासिक विजय पर दमण में भाजपाईयों ने निकाली भव्य बाइक रैली

Asli Azadi

Leave a Comment