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सांसद उमेश पटेल ने लोकसभा में दमण-दीव के किसानों और मछुआरों से जुडे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया

असली आजादी न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली 18 मार्च। दमण-दीव सांसद उमेश पटेल ने आज लोकसभा में कृषि मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान अपने क्षेत्र के किसानों और मछुआरों से जुडे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से उठाया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि खेत में अन्न उगाने वाला किसान हो या समुद्र से जीवन निकालने वाला मछुआरा – दोनों इस देश की थाली भरते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से आज दोनों ही अपनी थाली भरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कृषि की परिभाषा केवल खेतों तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि समुद्री मत्स्य पालन को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। सांसद उमेश पटेल ने दमण और दीव में उत्पन्न गंभीर डीज़ल संकट का मुद्दा उठाते हुए बताया कि हालिया अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिलटेड द्वारा डीज़ल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे स्थानीय स्तर पर भारी कमी और कीमतों में असामान्य वृद्धि देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि दमण और दीव का पारंपरिक मछुआरा समुदाय पूरी तरह समुद्री मत्स्य व्यवसाय पर निर्भर है और डीजल उनके लिए जीवनरेखा के समान है। वर्तमान स्थिति में अनेक नौकाएँ समुद्र में नहीं जा पा रही हैं, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका संकट में आ गई है। सांसद ने इस मुद्दे पर तेल कंपनियों के रवैये पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि कठिन समय में उद्योगों को सामाजिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने सरकार के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखीं। जिसमें मछुआरों के लिए डीज़ल की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से बहाल की जाए, तेल कंपनियों को प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं, भविष्य में संकट से बचाव हेतु विशेष आपूर्ति तंत्र विकसित किया जाए, रियायती अथवा नियंत्रित दर पर डीज़ल उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए, मच्छीमारी में उपयोग होने वाले डीजल को आजीविका के लिए आवश्यक साधन घोषित किया जाए, डीजल एवं पेट्रोल को कृषि के अंतर्गत लाकर सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया जाए, बर्फ निर्माण हेतु उपयोग होने वाली बिजली को भी कृषि दरों पर उपलब्ध कराया जाए, समर्पित डीज़ल आपूर्ति तंत्र, रियायती डीज़ल योजना और आपातकालीन ईंधन आपूर्ति प्रणाली लागू किया जाए, मछुआरों के लिए फिशरमैन डेवलपमेंट बोर्ड का गठन हो जैसी मांग की। सांसद उमेश पटेल ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि कृषि योजनाओं का मूल्यांकन केवल राष्ट्रीय औसत से नहीं, बल्कि सबसे छोटे और कमजोर क्षेत्रों के आधार पर होना चाहिए। दादरा नगर हवेली तथा दमण-दीव को शामिल किए बिना समावेशी कृषि की कल्पना अधूरी है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि यदि हमें सच में समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत बनाना है, तो खेत के किसान और समुद्र के मछुआरे दोनों के पसीने को समान सम्मान देना होगा।

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