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सांसद मोहन डेलकर आत्महत्या मामले में दर्ज एफआईआर को मुंबई हाईकोर्ट ने किया निरस्त

– मुंबई हाईकोर्ट ने कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए सभी नौ आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी को किया निरस्त – 9 मार्च 2021 स्व. मोहन डेलकर के पुत्र अभिनव डेलकर ने प्रशासक प्रफुल पटेल, दानह कलेक्टर संदीप कुमार सिंह, तत्कालीन एसपी शरद दराडे, तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर अपूर्व शर्मा, एसडीपीओ मनस्वी जैन, सिलवासा पुलिस थाना प्रभारी मनोज पटेल, संघ प्रदेश के लॉ सेक्रेटरी रोहित यादव, भाजपा नेता फतेहसिंह चौहाण और दिलीप पटेल के खिलाफ मुंबई के मरीन ड्राईव पुलिस थाने में दर्ज करायी थी शिकायत – तत्कालीन दानह कलेक्टर संदीप कुमार सिंह सहित के आरोपियों ने साजिशन फंसाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर को रद्द करने की मांग को लेकर मुंबई हाईकोर्ट में लगाई थी गुहार – मुंबई हाईकोर्ट का आज का फैसला प्रशासन के लिए ऐतिहासिक: प्रशासनिक अधिकारियों मनोबल गिराने की कोशिश को लगा झटका
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, मुंबई 8 सितंबर। दादरा नगर हवेली के सांसद मोहन डेलकर आत्महत्या मामले में मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को मुंबई हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। सांसद मोहन डेलकर ने पिछले साल 22 फरवरी को दक्षिण मुंबई के मरीन ड्राइव के एक होटल के एक कमरे में आत्महत्या कर ली थी। स्व. मोहन डेलकर के पुत्र अभिनव डेलकर ने प्रशासक प्रफुल पटेल, दानह कलेक्टर संदीप कुमार सिंह, तत्कालीन एसपी शरद दराडे, तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर अपूर्व शर्मा, एसडीपीओ मनस्वी जैन, सिलवासा पुलिस थाना प्रभारी मनोज पटेल, संघ प्रदेश के लॉ सेक्रेटरी रोहित यादव, भाजपा नेता फतेहसिंह चौहाण और दिलीप पटेल के खिलाफ मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 506 (आपराधिक धमकी), 389 (किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने के डर से), जबरन वसूली के लिए अपराध) और 120बी (आपराधिक साजिश) और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कराया था। इस एफआईआर के खिलाफ तत्कालीन दानह कलेक्टर संदीप कुमार सिंह एवं अन्य अधिकारियों ने मुंबई हाईकोर्ट में गुहार लगाते हुए उन्हें साजिशन फंसाने का आरोप लगाते हुए उक्त एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी। मुंबई हाईकोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद आज न्यायमूर्ति पीबी वराले और न्यायमूर्ति एसडी कुलकर्णी की खंडपीठ ने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए कहा हम याचिकाओं में योग्यता पाते हैं। यह अदालत के लिए उपयुक्त मामला है कि वह कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए इस एफआईआर को रद्द कर दे। मुंबई हाईकोर्ट के फैसले ने प्रशासनिक अधिकारियों के मनोबल को गिरने से बचा लिया है। इसके साथ-साथ पिछले डेढ साल से प्रशासक प्रफुल पटेल पर आरोप लगाकर उन्हें घेरने की कोशिश करने वालों को कानूनी झटका लगा है। मुंबई हाईकोर्ट में प्रशासन की ओर से संघ प्रदेश थ्रीडी स्टेट काउंसिल के अधिवक्ता हितेन वेनेगावकर एवं अधिवक्ता सनी भीमरा ने दलीले पेश की थी।

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