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दानह विद्युत निगम और दमण-दीव विद्युत विभाग की मार्केट वैल्यू बिजनेस से नहीं हुई तय बल्कि जमीन में बिछे केबलों और खंभे पर लटकते तारों से हुई तय

– 1 लाख 45 हजार से ज्यादा ग्राहक, 4500 करोड रुपये का टर्नओवर, 150 करोड का प्रॉफिट को निगम/विभाग को बेचने की कीमत तय करते समय कर दिया गया नजरअंदाज
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण 12 जनवरी। दादरा एवं नगर हवेली के विद्युत निगम और दमण-दीव के विद्युत विभाग का निजीकरण करने की प्रक्रिया के समय मार्केट वैल्यू बिजनेस के आधार पर तय नहीं हुई है। जानकारों की माने तो निगम/विभाग की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के समय इसकी मार्केट वैल्यू तय करने के मापदंड में भारी भरकम भूल हुई है। क्योंकि 1 लाख 45 हजार से ज्यादा ग्राहक, 4500 करोड रुपये का टर्नओवर, 150 करोड का प्रॉफिट को मार्केट वैल्यू तय करते समय नजरअंदाज करते हुए सिर्फ जमीन में बिछे केबलों और खंभे पर लटकते तारों सहित की प्रॉपर्टी को ही ध्यान में रखते हुए कीमत तय की गयी थी। जिसके चलते 5000 करोड रुपये की मार्केट वैल्यू वाला दानह विद्युत निगम और दमण-दीव विभाग की मार्केट वैल्यू 360 करोड रुपये के आसपास ही सिमट कर रह गयी थी। जिसके चलते इसकी 51 प्रतिशत हिस्सेदारी 185 करोड रुपये के आसपास ही तय की गयी थी। 185 करोड रुपये के सामने टोरेंट पावर ने 555 करोड रुपये की बोली लगाकर निगम और विभाग की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी यानि कि मालिकाना हक प्राप्त कर लिया। केन्द्र सरकार ने दादरा नगर हवेली विद्युत निगम और दमण-दीव विद्युत विभाग की मार्केट वैल्यू तय करते समय दोनों का बिजनेस, टर्नओवर, ग्राहक और मुनाफे के मानक पर कीमत तय की होती तो यह कीमत 5000 करोड रुपये के पार होती। कॉपार्ेरेट जगत की भाषा में समझे तो जो कंपनी बिक रही हो उसकी कीमत कम से कम उसके एक साल के टर्नओवर के बराबर होती है। जो निजी कंपनी शेयर बाजार में लिस्टिंग के साथ पब्लिक लिमिटेड बनती है तो उसका शेयर वैल्यू भी उसकी प्रॉपर्टी के साथ-साथ उसके बिजनेस, उसके ग्राहक और उसकी प्रॉफिट के आधार पर तय होता है। जिस दिन से टोरेंट पावर ने केन्द्रशासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली और दमण-दीव का बिजली कारोबार का अधिकार प्राप्त किया है तब से सभी के मन में यहीं सवाल बार-बार उठ रहा था कि आखिरकार इतने कम दामों में कैसे निगम और विभाग बिक रहा है। लेकिन आज यह खुलासा हो चुका है कि निगम और विभाग की मार्केट वैल्यू तय करते समय हजारों ग्राहक, करोडों रुपये का टर्नओवर और 150 करोड के प्रॉफिट को नजरअंदाज कर दिया गया था।

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