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केन्द्रशासित प्रदेश दादरा नगर हवेली एवं दमण-दीव बिजली वितरण कंपनी की मार्केट वेल्यू कम से कम 5000 करोड रुपये होनी चाहिए

– थ्रीडी के बिजली विभाग / निगम के निजीकरण की जल्दबाजी में कही हो तो नहीं रही बडी चूक?
– केन्द्रशासित प्रदेश दादरा नगर हवेली एवं दमण-दीव बिजली विभाग / निगम के 1,45,000 उपभोगक्ता, 4500 करोड रुपये का टर्न ओवर, 150 करोड रुपये का मुनाफा वाली कंपनी का मार्केट वेल्यू 300 करोड से नीचे किसने और कैसे तय किया गया?
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण 04 जनवरी। केन्द्रशासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली और दमण-दीव के बिजली विभाग/निगम पर कुछ दिनों के बाद गुजरात की निजी कंपनी टोरेंट पावर का आधिपत्य होने जा रहा है ऐसे में प्रदेश की जनता के मन में यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि पूरे देश में बिजली वितरण व्यवस्था उत्कृष्ठ उदाहरण पेश करने वाला आज नीलाम क्यूं हो रहा है? 1 लाख 45 हजार उपभोक्ताओं, 4500 करोड रुपये का टर्न ओवर, 150 करोड रुपये से ज्यादा का मुनाफा वाले बिजली विभाग/निगम की मार्केट वेल्यू 300 करोड से नीचे किसने और कैसे तय की? केन्द्रशासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली और दमण-दीव के बिजली विभाग/निगम के उपभोक्ताओं, टर्न ओवर और मुनाफे को कॉपार्ेरेट जगत की दृष्टि से देखे तो इस बिजली वितरण कंपनी की मार्केट वेल्यू कम से कम 5000 करोड रुपये होनी चाहिए। सरकार इसका 51 प्रतिशत हिस्सेदारी (शेयर) बेच रही है यानि की कम से कम 2500 करोड रुपये तक इसकी बोली जानी चाहिए थी। तीन दशक तक केन्द्र सरकार, स्थानीय प्रशासन एवं बिजली विभाग के अधिकारियों एवं इंजीनियरों की कडी मेहनत के कारण केन्द्रशासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली और दमण-दीव का बिजली विभाग पूरे देश को प्रेरणा देने लायक बन चुका था। एक तरफ दूसरे राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों के बिजली विभाग और निगम करोडों रुपये के घाटे में डूब रहे थे तब हमारे प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था 247 बिना रुके सबसे सस्ती बिजली, सभी प्रकार की सेवाएं ऑनलाइन, करोडों का मुनाफा और प्रदेशवासियों का दिल जीतने में कामियाब रहा था। गुजरात की निजी कंपनी टोरेंट पावर जिसने महज 555 करोड रुपये की बोली लगाकर हमारे प्रदेश की बिजली व्यवस्था अपने नाम कर ली है। कुछ दिनों में केन्द्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के आदेशानुसार केन्द्रशासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली और दमण-दीव प्रशासन टोरेंट पावर कंपनी को विधिवत रुप से बिजली व्यवस्था का संचालन का पत्र सौंप देगा। इसके साथ ही इस प्रदेश में उत्कृष्ट सरकारी विभाग/निगम की सेवा का अंत हो जायेगा। आनेवाली पीढी सवाल जरुर करेगी कि औने-पौने दामों में बिजली विभाग/निगम बिक रहा था तब आप क्या कर रहे थे? क्या किसी पंचायत सदस्य, सरपंच, जिला पंचायत सदस्य, काउंसिलर, सांसद या किसी पार्टी के प्रमुख या पदाधिकारी ने इस पर आपत्ति नहीं जताई? क्या जनप्रतिनिधियों और राजनेताओं को केन्द्र सरकार तक सही आंकलन पहुंचाने की जिम्मेदारी नहीं निभानी चाहिए थी? कुल मिलाकर देखे तो केन्द्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने जिस उद्देश्य के साथ देश के सभी केन्द्रशासित प्रदेशों के बिजली विभागों, निगमों एवं कंपनियों का निजीकरण करने का फैसला लिया था उस मापदंड में हमारा प्रदेश तो पहले से सभी उद्देश्यों को सरकारी होते हुए भी हासिल कर चुका था। चंडीगढ बिजली विभाग/निगम की निजीकरण प्रक्रिया हमारे केन्द्रशासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली और दमण-दीव पहले शुरु हुई थी, लेकिन सबसे पहले हमारा ही निजीकरण होने जा रहा है। वजह साफ है क्योंकि केन्द्रशासित प्रदेश थ्रीडी का बिजली विभाग/निगम मार्केट वेल्यू से सिर्फ 20 प्रतिशत राशि में ही मिल रहा है। यहां कुल बिजली वितरण का 95 प्रतिशत बडे और छोटे उद्योगों द्वारा उपयोग में लिया जाता है। यानि कि 95 प्रतिशत बिजली उपयोग करने वाली सिस्टम में लाइन लॉस की संभावना न के बराबर है। इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक और बिल भुगतान का प्रतिशत 99.99 यानि कि मुनाफा के अलावा कुछ नहीं।

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