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केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप को डीजल जनरेटर बिजली से मुक्त कर सोलर एवं विंड से हरित ऊर्जा आधारित बनाना भी प्रफुल पटेल के विरोध का है एक कारण

– केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में हर वर्ष 60 लाख यूनिट बिजली की है खपत : करोडों रुपये का डीजल फूकने के बाद प्रशासन को 28.75 रुपये प्रति युनिट पडती है बिजली, जनता को 4.77 रुपये प्रति यूनिट बिजली देता है प्रशासन – हर वर्ष लक्षद्वीप में सिर्फ बिजली सबसिडी 140 करोड रुपये होती है खर्च : डीजल के उपयोग से प्रदूषण से पर्यावरण पर पडता है विपरित असर – प्रशासक प्रफुल पटेल ने लक्षद्वीप की 9 मेगावॉट बिजली जरुरत को सोलर प्लांट और विंड पावर से पूरा करने का शुरु किया है अभियान : डीजल की खपत में करोडों कमाने वाले बिचौलियों को इससे है दिक्कत – लक्षद्वीप में 2 मेगावॉट का सोलर प्लांट और विंड पावर को अबतक जानबुझकर रखा गया था खस्ताहाल : इंचार्ज प्रशासक का प्रभार संभालने के साथ प्रफुल पटेल ने हरित ऊर्जा के स्त्रोत को फिरसे शुरु कराने का किया प्रयास – #savelakshwadeep का कैंपेन चलाने वाले डीजल आधारित जनरेटर से फैल रहे प्रदूषण पर क्यों है चुप
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण 01 जून। केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के प्रभारी प्रशासक प्रफुल पटेल के खिलाफ मोर्चा खोलने के कारणों में एक और कारण है जो बिचौलियों की दुखती रग पर हाथ रखने जैसा है। प्रशासक प्रफुल पटेल ने मोदी सरकार के एजेंडे के तहत लक्षद्वीप को हरित ऊर्जा आधारित बनाने की दिशा में प्रयास शुरु किया है। जिसके तहत लक्षद्वीप में डीजल आधारित जनरेटरों से बिजली सप्लाई व्यवस्था के स्थान पर हरित ऊर्जा सोलर पावर प्लांट और विंड पावर से लक्षद्वीप की 9 मेगावॉट की बिजली जरुरतों को पूरा करने के लिए ठोस प्रयास शुरु किये है। जिसके चलते हर वर्ष करोडों रुपये के डीजल की खरीदी एवं खपत में कटमनी प्राप्त करने वाला एक बडा तबका नाराज हो गया है। लक्षद्वीप को हर वर्ष 60 लाख यूनिट की आवश्यकता होती है। लक्षद्वीप की बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत सरकार द्वारा 145 करोड खर्च किये जाते है। प्रशासन को बिजली 28.75 रुपये पडती है और प्रशासन जनता को 4.77 रुपये में देता है। जिससे भारत सरकार को हर वर्ष 140 करोड रुपये का घाटा होता है। दूसरे शब्दों में कहे तो भारत सरकार 70 हजार की आबादी के लिए 140 करोड रुपये सबसिडी देती है। इसके साथ-साथ लाखों लीटर डीजल का प्राकृतिक रुप से सुंदर लक्षद्वीप में उपयोग होने से प्रदूषण की मात्रा भी अनेक गुना बढ जाती है। प्रशासक प्रफुल पटेल ने पदभार संभालने के साथ बिजली पैदा करने के लिए डीजल आधारित जनरेटर व्यवस्था का बारिकी से मूल्यांकन शुरु किया। प्रशासक की समीक्षा के साथ ही एक ही झटके में बिजली की लागत 28.75 रुपये प्रति यूनिट से घटकर 25 रुपये प्रति यूनिट पर आ गई। प्रशासक प्रफुल पटेल ने लक्षद्वीप में बंद पडे सोलर प्लांट और विंड पावर को फिरसे शुरु करने के लिए प्रयास तेज किये। साथ ही साथ लक्षद्वीप की पूरी बिजली आपूर्ति सोलर एवं विंड पावर से करने की दिशा में जरुरी कदम उठाये। प्रशासक प्रफुल पटेल द्वारा डीजल जनरेटर बिजली व्यवस्था पर किया गया वार बिचौलिये सहन नहीं कर पाये। क्योंकि हर वर्ष 145 करोड के पूरे खेल में करोडों रुपये बिचौलियों की जेब में जाते थे। #savelakshwadeep का कैंपेन चलाने वाले डीजल से फैलने वाले प्रदूषण पर चूप क्यों है? क्या उन्हें डीजल से फैल रहे प्रदूषण से मुक्त कराने का प्रशासन का अभियान नजर नहीं आ रहा है? शायद नहीं क्योंकि यह मुद्दा अबतक दबाये रखने में कुछ लोग कामियाब रहे है। खैर पीएम मोदी ने प्रफुल पटेल को केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप का सिर्फ अतिरिक्त प्रभार सौंपा था। अतिरिक्त प्रभार होते हुए भी प्रशासक प्रफुल पटेल ने पिछले 70 सालों से प्राथमिक सुविधाओं एवं विकास को तरसे रहे लक्षद्वीप का भाग्य बदलने के लिए इमानदारी से प्रयास किया है। देश के करोडों रुपये व्यय होने के साथ प्रदूषण पर भी नकेल कसना अगर गुनाह है तो प्रफुल पटेल ने बडा गुनाह किया है।

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