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वलसाड जिला एसओजी पुलिस ने रेमडेसीवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते दो को किया गिरफ्तार

– वलसाड जिला पुलिस की रेमडेसीवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों पर दबिश
– दाभेल आटियावाड स्थित ब्रुक फार्मा कंपनी का टेक्नीकल डायरेक्टर मनीष सिंह और दमण निवासी वरुण कुंद्रा को रंगे हाथों 18 रेमडेसीवीर इंजेक्शन के साथ एसओजी पुलिस ने धरदबोचा
असली आजादी न्यूज नेटवर्क, दमण 15 अप्रैल। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डॉ. एस. पी. राजकुमार तथा वलसाड जिला पुलिस अधिक्षक डॉ. राजदीप सिंह झाला द्वारा कोविड-19 की महामारी में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में उपयोग में आने वाले रेमडेसीवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी की खबरें प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया में वायरल होती देख इस प्रकार की कालाबाजारी करने वाले तत्वों को पकडकर उनके खिलाफ कार्यवाही करने की सूचना दी थी। इस सूचना के आधार पर एसओजी शाखा के पुलिस इंस्पेक्टर वी. बी. बारड के मार्गदर्शन में पुलिस सब इंस्पेक्टर अमीराज सिंह राणा तथा एसओजी स्टाफ ने वापी विस्तार में रेमडेसीवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों को पकडने के लिए पेट्रोलिंग शुुरु कर दिया था। कल 14 अप्रैल को पुलिस सब इंस्पेक्टर अमीराज सिंह राणा ने गुप्त सूचना के आधार पर वापी जीआईडीसी, यूपीएल ओवर ब्रिच के पास वापी से वलसाड की ओर जाने वाले सर्विस रोड पर ट्रेप लगाकर खुद (पीएसआई अमीराज सिंह राणा) ग्राहक बनकर वरुण सुरेन्द्र कुंद्रा से मिले। उन्होंने कोविड-19 के मरीज के लिए 12 रेमडेसीवीर इंजेक्शन की जरुरत होने की बात वरुण सुरेन्द्र कुंद्रा से कही। वरुण सुरेन्द्र कुंद्रा ने 1 इंजेक्शन की कीमत 12000 रुपये बताते हुए 12 इंजेक्शन के लिए 1,44,000 रुपये कीमत बताते हुए अपनी जेब से बिना लेबल के सफेद पावडर भरी हुई रेमडेसीवीर इंजेक्शन की बोतल दिखाई। ग्राहक बने हुए पीएसआई अमीराज सिंह राणा इशारा करके एसओजी की टीम को बुला लिया और वरुण कुंद्रा निवासी अवंतिका अपार्टमेंट, दिलीपनगर लेन नं. 5, दमण को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। स्थल पर ही वरुण कुंद्रा को इस इंजेक्शनों के बारे में पुलिसिया अंदाज में पूछा तो उसने बताया कि दमण की आटियावाड स्थित ब्रुक फार्मा कंपनी का टेक्नीकल डायरेक्टर उसका दोस्त है उसी के पास से यह इंजेक्शन प्राप्त किया है। पुलिस ने वरुण कुंद्रा से फोन के द्वारा मनीष सिंह का संपर्क करवाकर और 6 इंजेक्शन की आवश्यकता होने का जाल बिछाया। मनीष सिंह (निवासी, जलाराम सोसायटी चणोद कॉलोनी, वापी) जैसे ही वरुणकुंद्रा द्वारा बताई जगह पर पहुंचा तो एसओजी की टीम ने मनीष सिंह को चारों ओर से घेर लिया। पुलिस ने जब उसकी तलाशी ली तो उसके जेब से 6 और रेमडेसीवीर इंजेक्शन मिले। एसओजी ने मनीष सिंह और वरुण कुंद्रा से इस इंजेक्शनों के अपने रखने के लिए, बिक्री के लिए कोई परमिट या मेडिकल ऑफिसर का डी्क्रिरप्शन है या नहीं यह पूछने पर उनके पास ऐसा कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात कही। मनीष सिंह ने खुलासा करते हुए कहा कि वरुण कुंद्रा की फर्नीचर की दुकान पर मैं फर्नीचर लेने गया था तब मेरी पहचान उनसे हुई थी। दो दिन पहले वरुण कुंद्रा का मेरे पर फोन आया था कि उनके संबंधी को कोरोना पॉजिटिव हुआ है और रेमडेसीवीर इंजेक्शन की जरुरत है इसलिए मैंने हमारी कंपनी में से रेमडेसीवीर इंजेक्शन दिया था। वरुण ने अपने कुबलात नामे में कहा कि कोरोना महामारी में इंजेक्शन की किल्लत को देखकर अच्छा मुनाफा मिलेगा इस आशय से मनीष सिंह से झूठ बोलकर ये इंजेक्शन प्राप्त किया था। इस इंजेक्शन को प्रति नग 12000 रुपये में बेचने की बात भी वरुण कुंद्रा ने कबूली है। पुलिस ने पकडे गये दोनों आरोपियों से कुल 18 रेमडेसीवीर इंजेक्शन और 3 मोबाइल जप्त किये है। एसओजी द्वारा जारी प्रेस विज्ञिप्त के मुताबिक ब्रुक फार्मा कंपनी के पास कैंसर की दवा तथा रेमडेसीवीर इंजेक्शन के उत्पादन तथा इस इंजेक्शन के एक्सपोर्ट का कानूनी लाइसेंस है। वापी जीआईडीसी पुलिस स्टेशन में इस मामले में आईपीसी की धारा 420, 34 तथा आवश्यक चीज-वस्तुओं की अधिनियम की कलम 3, 7 तथा डिजास्टर मैनेजमेंट की एक्ट की कलम 53 एवं ड्रग्स एंड कोस्मेटिक एक्ट की कलम 27 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आगे की जांच एसओजी के पीएसआई अमीराज सिंह राणा कर रहे है। इस ऑपरेशन में एसओजी पुलिस इंस्पेक्टर वी. बी. बारड, एसओजी पीएसआई अमीराज सिंह राणा, एसओजी अ. पुलिस कांस्टेबल हसमुख गीगाभाई तथा पुलिस कांस्टेबल केतन ईश्वरभाई शामिल थे।

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